God Shiva : सनातम धर्म में 108 संख्या को बेहद शुभ माना गया है। साथ ही भगवान शिव से भी इसके संबंध जोड़े जाते है। यहां तक की धर्म से लेकर ज्योतिष तक में 108 की पावन संख्या का महत्व होता है। कारण जानने के लिए आगे पढ़ें…
बता दें कि हिंदू धर्म में किसी भी मान्यता या परंपरा के पीछे कोई ठोस कारण अवश्य होता है। भगवान के 108 गुणगान करने वाले नाम हो या 108 जाप करने वाली माला, इस संख्या को सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। वृंदावन के अखंड दया धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद जी महाराज के अनुसार इस संख्या में संपूर्ण ब्रह्मांड का रहस्य छिपा है। उनके अनुसार अंक 1 परमपिता परमेश्वर की एकता को दर्शाता है, फिर चाहे वह त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में दिखाई देता हो। वहीं अंक 0 निर्गुण, निराकार ब्रह्म का प्रतीक है, और 8 अंक पूरी प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है, यानि पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, तेज, मन, बुद्धि और अहंकार समाहित है।
108 संख्या और भगवान शंकर संबंध
सनातन धर्म में 108 कोई साधारण संख्या नहीं है। भगवान शंकर से इस संख्या का विशेष रूप से जुड़ाव है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का रूप अत्यंत ही कल्याणकारी माना गया है। हिंदू मान्यता के अनुसार सृष्टि के रचना से पहले भगवान शिव बाल रूप में प्रकट हुए और उन्होंने रुदन करना प्रारंभ कर दिया। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें कई नाम से बुलाकर शांत कराना चाहा।
कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी एक नाम लेते तो भगवान शिव शांत हो जाते थे। इसी क्रम में ब्रह्मा जी भगवान शिव को 108 नामों से संबोधित किया, र वही नाम उनकी महिमा का गुणगान करने वाले 108 नाम बन गये। इसलिए उनके गुणों का गान करने के लिए उनके 108 नाम पूजा के दौरान विशेष रूप से लिए जाते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार यह नाम सबसे पहले ब्रह्मा जी ने लिए थे। वहीं कुछ लोग इसे भगवान शिव के तांडव नृत्य की 108 प्रकार की मुद्राओं से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि महादेव का मनका कहे जाने वाले रुद्राक्ष की माला में भी कुल 108 दानें होते हैं।
सूर्य की कलाओं का प्रतीक
सनातन धर्म में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य से भी 108 अंक का महत्वपूर्ण जुड़ाव है। बता दें कि चंद्रमा की जहां 16 कलाएं होती हैं, वहीं सूर्य देवता की कुल 2,16,000 कलाएं होती हैं, क्योंकि सूर्य छह महीने उत्तर दिशा और छह महीने दक्षिणा दिशा में उगते हैं इसलिए उनकी एक समय की कला 108000 होती है। इस संख्या में से यदि अंतिम के तीन शून्य हटा दिये जाएं तो कुल संख्या 108 अंक ही होती है। हिंदू मान्यता में किसी भी माला में 108 की संख्या को सूर्य की एक-एक कलाओं का प्रतीक भी माना जाता है।
ज्योतिष क्रिया में 108 अंक का महत्व
ज्योतिष क्रिया में 108 अंक को ग्रह, नक्षत्र और 12 राशियों से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार यदि 12 राशियों और 09 ग्रहों को गुणा करें तो 108 की पवित्र संख्या ही आती है। इसी तरह यदि 27 नक्षत्र और उनके चार चरण को गुणा करें तो भी 108 अंक ही आता है।
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