Delhi NCR

महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर SC सख्त, पुलिस अधिकारी को तलब कर मांगा जवाब

Supreme Court : दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को मौजूद रहने और आरोपों पर सफाई देने को कहा है. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट किया कि अदालत जानना चाहती है कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित तौर पर क्या हुआ.

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि अदालत चाहती है कि कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे और पूरे मामले पर स्पष्टीकरण दे. पत्रकार संगठनों की ओर से दाखिल याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा. इन याचिकाओं में विशेष रूप से महिला पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है.

पत्रकार संगठनों ने अदालत में उठाया मुद्दा

‘नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया’ (NWMI) की ओर से दायर याचिका का वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जिक्र किया, उन्होंने अदालत का ध्यान महिला पत्रकारों की सुरक्षा और रिपोर्टिंग के दौरान कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे की ओर खींचा, उन्होंने बताया कि इस मामले में सॉलिसिटर जनरल को पहले ही सूचना दी जा चुकी है.

अदालत ने इस याचिका को गुरुवार, 15 अक्टूबर को पुलिस की कथित कार्रवाई से जुड़े मामले के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की बात कही है.

10 अक्टूबर के आदेश का भी दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने ‘फ्रीडम स्पीच कलेक्टिव’ की ओर से दाखिल अवमानना याचिका का भी उल्लेख किया. इसमें आरोप लगाया गया है कि पत्रकारों के साथ कथित मारपीट सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्टूबर के आदेश के विपरीत थी. याचिका के मुताबिक, अदालत ने विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को परेशान नहीं करने की बात कही थी.

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