Munir Army Exposed : पाकिस्तान में सेना का दबदबा सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित है। नेता प्रतिपक्ष महमदू खान अचकचई के मुताबिक, पाकिस्तान आर्मी में सिर्फ 4 जिलों के लोग कमान संभालते हैं और यही लोग सत्ता पर काबू रखते हैं। बलूचिस्तान और खैबर में जारी संघर्ष का मुख्य कारण यही सैन्य ढांचा है। अचकचई का कहना है कि बिना इस ढांचे में बदलाव किए पाकिस्तान में शांति नहीं हो सकती।
डॉन अखबार के मुताबिक, महमूद खान अचकचई ने संसद की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान सेना में पंजाब प्रांत का दबदबा है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान आर्मी में जवानों का क्षेत्रवार वितरण इस तरह है-
पंजाब: 52%
सिंध: 20.52%
खैबर पख्तूनख्वा: 16.28%
बलूचिस्तान: 6.04%
पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान: 2.54%
इसके अलावा, पाक सेना में सिर्फ 3.52% जवान हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।
पाकिस्तान सेना में रावलपिंडी, झेलम, अटक और सुकुर जिलों का दबदबा है। आधे से ज्यादा सैनिक इन्हीं इलाकों से आते हैं। सेना के चीफ आसिम मुनीर और मिलिट्री इंटेलिजेंस हेड वाजिद अजीज भी रावलपिंडी के रहने वाले हैं।
पंजाब के सैनिकों ने दी कुर्बानियां
इस आंकड़े के सामने आने के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना सतर्क हो गई है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पंजाब के सैनिकों ने सबसे ज्यादा कुर्बानियां दी हैं और इसे इतिहास नहीं भूला जा सकता। सेना ने बयान जारी कर कहा कि भर्ती करते समय किसी इलाके को प्राथमिकता नहीं दी जाती।
खैबर पख्तूनख्वाह भी है बड़ा प्रांत
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आबादी सिर्फ 1.5 करोड़ है। खैबर पख्तूनख्वाह भी बड़ा प्रांत है, आबादी 4 करोड़ है। राजधानी इस्लामाबाद में करीब 1 करोड़ लोग रहते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों के लोगों को सेना में ज्यादा जगह नहीं मिलती।
तीन मुख्य वजहें हैं-
पाकिस्तान में सेना का दबदबा है, सरकार को भी सेना नियंत्रित करती है। बलूचिस्तान और खैबर प्रांत में सेना के खिलाफ विद्रोह चल रहा है, जिसे पूरी तरह काबू नहीं किया जा सकता।आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सेना इन प्रांतों में मनमाने तरीके से ऑपरेशन चला रही है।
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