
Strawberries Farming : स्ट्रॉबेरी एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जिसे घर पर गमलों या ग्रो बैग में उगाना बहुत आसान है। भारत में सितंबर के अंत से दिसंबर तक का समय इसे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। सही देखभाल और पोषण के साथ आप कुछ ही महीनों में ताजे और रसीले स्ट्रॉबेरी का आनंद ले सकते हैं।
पौधा तैयार करना:
- नर्सरी से सैपलिंग: शुरुआती लोगों के लिए नर्सरी से तैयार पौधा लाना सबसे आसान तरीका है।
- बीज से उगाना: बीज से भी उगाया जा सकता है, लेकिन फल आने में अधिक समय लगता है।
- रनर से नया पौधा: पहले से मौजूद पौधे की साइड टहनियों (रनर) से नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
गमला और मिट्टी:
- गमले की गहराई 8-10 इंच और चौड़ाई पर्याप्त होनी चाहिए। जल निकासी के लिए गमले में छेद होना आवश्यक है।
- मिट्टी हल्की और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए। मिश्रण के लिए सुझाव:
- 40% सामान्य मिट्टी
- 30% कोकोपीट (नमी बनाए रखने के लिए)
- 30% वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद
- थोड़ी नीम खली मिलाने से फंगस से बचाव होता है।
पौधा लगाने का तरीका:
- पौधे का क्राउन (जहां से पत्तियां निकलती हैं) मिट्टी के ऊपर रहना चाहिए।
- पौधे को मिट्टी में उतना ही दबाएं जितना वह नर्सरी बैग में था।
देखभाल और पोषण:
- धूप: रोजाना 6-8 घंटे की सीधी धूप आवश्यक है।
- पानी: मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही पानी दें। पत्तियों और फलों को गीला न करें।
- मल्चिंग: फल आने के बाद मिट्टी पर भूसा, सूखे पत्ते या नारियल के छिलके बिछाएं।
- खाद: हर 15-20 दिन में थोड़ी मात्रा में वर्मी कंपोस्ट या लिक्विड फर्टिलाइजर दें।
फल की तुड़ाई:
- पौधा लगाने के 50-60 दिनों बाद फल आने लगते हैं।
- स्ट्रॉबेरी पूरी तरह लाल होने पर ही तोड़ें। सुबह का समय फल तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
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