Digvijaya Singh : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर अपनी बात रखी है, उन्होंने हिंदुत्व से दूरी बनाने की सलाह देते हुए कहा कि इसकी ओर जाने वाले लोगों के दिल और दिमाग में नफरत होती है. दिग्विजय सिंह के इस बयान ने एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक बहस को चर्चा में ला दिया है.
दरअसल, दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ कर रहे हैं. यात्रा के पहले पड़ाव के बाद वह अपने गृह नगर राघौगढ़ पहुंचे, जहां उनके बेटे जयवर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया. इस दौरान आयोजित सभा में दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व के बीच अंतर बताते हुए कहा कि दोनों को एक जैसा समझना सही नहीं है.
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का वास्तविक संदेश पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का है, लेकिन इसे हिंदुत्व और नफरत से जोड़कर पेश किया जा रहा है. अगर लोगों को सनातन धर्म का सही अर्थ नहीं समझाया गया, तो वे हिंदुत्व की ओर आकर्षित हो सकते हैं.
पदयात्रा के पीछे बताई दो बड़ी वजहें
दिग्विजय सिंह ने 80 साल की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा शुरू करने के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य बताए. पहला, उनका आरोप है कि देश में लोकतंत्र की जगह एकतंत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है, उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी आरोपों का जिक्र करते हुए ईवीएम पर रोक लगाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की.
दूसरा उद्देश्य सनातन धर्म के नाम पर हिंदुत्व को आगे बढ़ाने का विरोध करना बताया.
राम मंदिर के चंदे का भी उठाया मुद्दा
सभा में दिग्विजय सिंह ने 1992 में महंत लालदास द्वारा लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का विरोध किए जाने का जिक्र किया. साथ ही राम मंदिर के लिए जुटाए गए 1400 करोड़ रुपये के चंदे का हिसाब भी उठाया, उन्होंने दावा किया कि महंत लालदास के हिसाब मांगने पर 8.29 करोड़ रुपये का विवरण दिया गया था.
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