MP Earthquake : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रविवार दोपहर भूकंप के झटके दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 3.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। फिलहाल इस घटना से किसी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश, पाकिस्तान के बलूचिस्तान और दिल्ली-NCR क्षेत्र में भी भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं।
खरगोन में दोपहर 12:15 बजे आया भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रविवार दोपहर करीब 12:15 बजे भूकंप आया। इसकी तीव्रता 3.0 थी और केंद्र खरगोन क्षेत्र में जमीन से लगभग पांच किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
हिमाचल प्रदेश के रामपुर में 4.1 तीव्रता के झटके
खरगोन में भूकंप आने से एक दिन पहले शनिवार तड़के हिमाचल प्रदेश के रामपुर क्षेत्र में भी धरती हिली थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 4:36 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। रामपुर, शिमला से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 5.9 तीव्रता का भूकंप
शनिवार सुबह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में भी तेज भूकंप दर्ज किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सुबह 10:07 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 5.9 मापी गई। इसका केंद्र खुजदार से लगभग 48 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में जमीन से करीब 25 किलोमीटर की गहराई पर था। शुरुआती जानकारी में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी।
पाकिस्तान का यह क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वर्ष 2005 में दक्षिण एशिया में आए 7.6 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में 74,000 से अधिक लोगों की जान गई थी।
6 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में भी महसूस हुए थे झटके
दिल्ली-NCR क्षेत्र में भी 6 अक्टूबर को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, उस रात करीब 10:23 बजे आए भूकंप की तीव्रता 4.9 दर्ज की गई थी। इसका केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन से लगभग 13 किलोमीटर नीचे बताया गया था।
भूकंप की घटनाओं पर नजर
खरगोन, हिमाचल प्रदेश, बलूचिस्तान और दिल्ली-NCR में दर्ज इन घटनाओं के बीच भूकंप की तीव्रता और केंद्र की गहराई अलग-अलग रही। हालांकि, केवल कुछ दिनों के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों में भूकंप दर्ज होने से किसी बड़े भूकंप की आशंका का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। किसी भी घटना के संभावित प्रभाव का आकलन स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक निगरानी के आधार पर किया जाता है।
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