France Student Protest : फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। सितंबर में पेरिस के उत्तरी हिस्से के एक स्कूल से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते कई शहरों तक फैल गया। छात्रों के साथ शिक्षक भी व्यवस्थागत कमियों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
स्कूलों में भीड़, संसाधनों की कमी और शिक्षकों की कमी बनी वजह
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जर्जर इमारतें, कक्षाओं में डेस्क-कुर्सियों की कमी और शिक्षकों के खाली पद लंबे समय से समस्या बने हुए हैं। कई बार शिक्षक अनुपस्थित होने पर उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से कक्षाएं तक रद्द करनी पड़ती हैं।
पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में 21 सितंबर को छात्रों ने शिक्षकों के समर्थन में विरोध शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगें कर्मचारियों और संसाधनों की कमी दूर करने से जुड़ी थीं। स्कूल में अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था किए जाने के बाद वहां का विरोध समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद यही मांग दूसरे स्कूलों में भी उठने लगी।
पेरिस से लिले और मार्सिले तक फैला आंदोलन
विरोध के दौरान हाई स्कूलों के गेट बंद किए जाने लगे और छात्रों ने कई स्थानों पर बैरिकेड खड़े कर दिए। उत्तर में लिले से लेकर दक्षिण में मार्सिले तक प्रदर्शन का असर दिखाई दिया। कई जगह कूड़ेदानों में आग लगाने और स्कूलों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। आंदोलन शुरू होने के बाद 100 से ज्यादा हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 400 स्कूल बंद रहे और कई स्थानों पर हिंसा हुई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ आलोचकों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।
झड़पों में छात्र हुए घायल
आंदोलन के हिंसक होने के बाद कई छात्रों, शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। लेंस शहर के पास एक घटना में एक छात्र के हाथ में गंभीर चोट आई। वहीं, एक 14 वर्षीय छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर होने पर सर्जरी करनी पड़ी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी शहर लेंस में एक छात्र के ग्रेनेड उठाने के दौरान हाथ गंवाने की जानकारी सामने आई है। टूर्स में एक अन्य छात्र की एक आंख की रोशनी जाने की भी रिपोर्ट है।
5 हजार से ज्यादा लोग हिरासत में
फ्रांस के न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 87 प्रतिशत नाबालिग बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए अधिकांश नाबालिगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने हिंसा के लिए कथित तौर पर एक ‘हिंसक अल्पसंख्यक’ को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार ने आंदोलन के पीछे हार्ड-लेफ्ट नेताओं के होने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, LFI सांसद लुई बोयार्ड ने इस आरोप से इनकार किया है।
पुरानी शिकायतों ने आंदोलन को दी धार
छात्रों का मौजूदा विरोध अचानक पैदा हुआ आंदोलन नहीं माना जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में कर्मचारियों और सुविधाओं की कमी को लेकर शिकायतें लंबे समय से मौजूद हैं। ऐसे कई वीडियो भी सामने आते रहे हैं जिनमें कक्षाओं में पर्याप्त फर्नीचर नहीं होने या शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति दिखाई गई है।
आलोचकों का कहना है कि सरकार की प्रतिक्रिया समस्या की गंभीरता के मुकाबले धीमी रही। उनका दावा है कि भीड़भाड़ वाले स्कूलों और सीमित संसाधनों वाली शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की जरूरतों के मुताबिक बदलाव नहीं किए गए।
आर्थिक दबाव से भी जूझ रहा फ्रांस
शिक्षा व्यवस्था का संकट ऐसे समय में सामने आया है जब फ्रांस आर्थिक दबावों का भी सामना कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में देश के सरकारी कर्ज को करीब 4 ट्रिलियन डॉलर बताया गया है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने से कर्ज संभालने की लागत बढ़ रही है।
फ्रांस की बढ़ती उम्रदराज आबादी के कारण पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च भी बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रक्षा खर्च में भी वृद्धि हुई है। इन आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी मांगों को पूरा करना मुश्किल चुनौती बन गया है।
दूसरे कर्मचारी समूह भी कर रहे प्रदर्शन
फ्रांस में असंतोष केवल छात्रों और शिक्षकों तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरे भी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी सरकारी खर्च पर नियंत्रण, वेतन से जुड़े मुद्दों और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की मांग उठा रहे हैं। सरकार के सामने इन अलग-अलग समूहों की मांगों का समाधान निकालना और बढ़ते विरोध को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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