Pregnancy Tips : प्रेग्नेंसी के दौरान हल्का तनाव सामान्य है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रेशर, नींद संबंधी परेशानियां और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, प्रीमैच्योर डिलीवरी और कम वजन वाले बच्चे का खतरा भी बढ़ जाता है।
ये हैं मुख्य कारण
तनाव के मुख्य कारणों में हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली में बदलाव, स्वास्थ्य और बच्चे को लेकर चिंता, तथा भविष्य की जिम्मेदारियों का दबाव शामिल हैं। सामान्य चिंता अस्थायी होती है और आसानी से संभाली जा सकती है, जबकि गंभीर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और रोजमर्रा के काम, मानसिक स्थिति और शरीर को प्रभावित करता है। लगातार ओवरथिंक करना, मूड में बदलाव, नींद न आना, थकान, भूख में बदलाव और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई इसके आम लक्षण हैं।
जन्म और शिशु के कम वजन होने का खतरा
तनाव का असर केवल मां तक सीमित नहीं रहता। अधिक तनाव से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो भ्रूण के मस्तिष्क विकास और शारीरिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। इससे समय से पहले जन्म और शिशु का कम वजन होने का खतरा बढ़ता है। डिलीवरी के दौरान भी तनाव प्रसव की अवधि बढ़ा सकता है और दर्द की तीव्रता बढ़ा सकता है।
मेडिटेशन व ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें
तनाव कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं को अपने पार्टनर, परिवार या भरोसेमंद मित्रों से बात करनी चाहिए। सकारात्मक और तथ्यात्मक जानकारी पर ध्यान दें, पौष्टिक भोजन लें, हल्के व्यायाम जैसे पैदल चलना या प्रसवपूर्व योग अपनाएं, पर्याप्त नींद लें, स्क्रीन टाइम कम करें और मेडिटेशन व ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
अगर तनाव लगातार बना रहे या असहनीय हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। गंभीर चिंता, अवसाद आदि होने पर फौरन मेडिकल सहायता आवश्यक है।
ये भी पढ़ें- तारिक ने पाकिस्तान के ‘नरसंहार’ को किया याद, भारत विरोधी यूनुस की खुली पोल
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप









