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पश्चिम एशिया संकट: ईरान से भारतीयों को निकालने में जुटा भारत, दुश्मन देशों के रास्ते भी खुलवाए

Middle East Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत का कूटनीतिक और दूतावासी तंत्र लगातार सक्रिय है। कठिन हालात के बावजूद भारतीय मिशन ऐसे रास्ते खोल रहा है जो सामान्य परिस्थितियों में लगभग असंभव माने जाते हैं।

दुश्मन देशों के रास्ते भी इस्तेमाल

भारत ने राहत अभियान के तहत ईरान से भारतीय नागरिकों को सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों में करीब 550 भारतीयों को Armenia और लगभग 90 नागरिकों को Azerbaijan सुरक्षित पहुंचाया गया है।

यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इन दोनों देशों के आपसी संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। इसके अलावा अजरबैजान के साथ भारत के रिश्ते भी हाल के समय में ज्यादा सहज नहीं रहे हैं।

9 हजार भारतीय ईरान में मौजूद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने जानकारी दी कि ईरान से निकाले गए लोगों में 284 भारतीय श्रद्धालु भी शामिल हैं, जो धार्मिक यात्रा पर वहां गए थे।
बताया गया है कि फिलहाल Iran में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जबकि कुछ कारोबारी, धार्मिक यात्री और समुद्री जहाजों पर काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। मौजूदा स्थिति में भारतीय मिशन छात्रों और अन्य संवेदनशील समूहों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहा है।

मुश्किल हालात में काम कर रहा भारतीय दूतावास

सूत्रों के मुताबिक तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी बेहद जोखिम भरे माहौल में लगातार काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई इलाकों में सुरक्षा स्थिति अस्थिर हो गई है और संचार व्यवस्था भी बाधित हो चुकी है।
इसके बावजूद भारतीय अधिकारी नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उनके परिवारों तक उनकी जानकारी पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

सड़क मार्ग से सुरक्षित निकासी

भारतीय दूतावास पहले नागरिकों को Tehran और अन्य क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाता है, उसके बाद सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों में भेजने की व्यवस्था की जाती है। वहां से उन्हें आगे सुरक्षित स्थानों तक ले जाया जाता है।

कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भारत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए भारत कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar लगातार खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi भी क्षेत्र के कई शीर्ष नेताओं से संपर्क में हैं, ताकि स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

ट्रंप के बयान पर भारत का रुख

इस बीच Donald Trump ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने के लिए कई देशों से अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं हुई है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक तरफ अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर शांति बनाए रखने की कोशिश भी कर रहा है।

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