Punjab

पंजाब राज्य सूचना आयोग ने जारी किया पंजाबी भाषा पर साहित्यिक ब्रोशर

International Mother Language Day-2026 : अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-2026, जो हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है, की महत्ता को मान्यता देते हुए और मातृभाषा पंजाबी को और अधिक प्रफुल्लित करने के लिए पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त इंद्रपाल सिंह धन्ना द्वारा राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू, वरिंदरजीत सिंह बिलिंग, डॉ. भूपिंदर सिंह बाथ, संदीप सिंह धालीवाल, पूजा गुप्ता तथा डी.के. तिवारी (आई.ए.एस.), अतिरिक्त मुख्य सचिव पंजाब सरकार की उपस्थिति में, आज यहां पंजाबी मातृभाषा को दर्शाता एक साहित्यिक ब्रोशर जारी किया गया।

बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज

यह साहित्यिक ब्रोशर राज्य सूचना आयुक्त, पंजाब हरप्रीत संधू द्वारा लिखा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-2026 के थीम ‘‘बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज’’ को उजागर करते हुए समाज में मातृभाषा ‘‘पंजाबी’’ को मान्यता देने और उसकी शान बहाल करने की आवश्यकता पर जोर देता है।

दिल तक पहुंचते हैं शब्द

पंजाब सूचना आयोग मुख्यालय में आयोजित एक समारोह के दौरान पंजाब राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू ने बताया कि उन्होंने यह पिक्टोरियल (तस्वीरों सहित) ब्रोशर नेल्सन मंडेला द्वारा कही गई प्रसिद्ध उक्ति से प्रेरित होकर तैयार किया है, ‘‘यदि आप किसी व्यक्ति से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो शब्द उसके दिमाग में जाते हैं, लेकिन यदि आप उससे उसकी मातृभाषा में बात करते हैं, तो वे उसके दिल तक पहुंचते हैं।’’ ताकि मातृभाषा पंजाबी की शानदार विरासत को और अधिक प्रफुल्लित किया जा सके।

विरासत को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक

राज्य सूचना आयुक्त पंजाब ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-2026 का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़कर मातृभाषा को अपनाने, सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक करना है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पंजाब, डी.के. तिवारी ने हरप्रीत संधू द्वारा तैयार साहित्यिक ब्रोशर की प्रशंसा की और इसे पंजाबी भाषा के प्रचार के लिए सार्थक प्रयास बताया।

जड़ों से जोड़ती है मातृभाषा

इस दौरान राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू, वरिंदरजीत सिंह बिलिंग, डॉ. भूपिंदर सिंह बाथ, संदीप सिंह धालीवाल तथा पूजा गुप्ता ने भी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की महत्ता पर अपने विचार साझा किए, क्योंकि मातृभाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की आत्मा है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमारे इतिहास तथा रीति-रिवाजों को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाती है। राज्य सूचना आयुक्तों ने कहा कि अपनी मातृभाषा को संभालकर और उत्साहित करके, हम न केवल अपनी विरासत का सम्मान करते हैं बल्कि मानवता की विविधता और एकता में भी योगदान डालते हैं।

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