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मिडिल-ईस्ट में युद्ध से भारतीय व्यापार होगा प्रभावित, ऊर्जा संकट गहराया… क्रिसिल

Middle East War : ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध का भारत के व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स ने हाल ही में बताया है कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो भारत के कई क्षेत्रों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। इनमें बासमती चावल, उर्वरक, हीरा व्यवसाय, LNG, ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं जिस पर युद्ध का सीधा प्रभाव पड़ेगा।

इस युद्ध का मुंबई के JNPT पोर्ट पर अभी से दिखना शुरू हो गया है। युद्ध शुरू होने से यहां 1000 से ज्यादा कंटेनर फंसे हुए हैं। इनमें ज्यादातर कृषि उत्पाद वाले कंटेनर हैं। भारत के साथ-साथ अन्य पूर्वी-एशियाई देशों पर भी ऊर्जा संकट मंडराने का खतरा बना हुआ है।

ये क्षेत्र होंगे प्रभावित

पश्चिमी एशिया संकट से भारत का व्यापार विशेषकर दैनिक जीवन के वस्तुएं प्रभावित होंगी। युद्ध शुरू होने से भारत में कृषि उत्पाद जैसे- प्याज, अंगूर, पपीता, अनार, तरबूज आदि पोर्ट पर ही फंसे हैं, जिससे उनके खराब होने की समस्या है। साथ ही पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े क्षेत्र जैसे- तेल रिफाइनरी, टायर, विशेष रसायन, ऊर्जा, ऊर्वरक, पेंट, पैकेजिंग और सिंथेटिक कपड़े आदि प्रभावित होंगे।

भारत में ऊर्जा संकट

भारत अपनी कुल तेल आयात का 11.5 प्रतिशत यूएई, 13.8 प्रतिशत सउदी-अरब, 17.9 प्रतिशत ईराक तथा नाइजीरिया, ओमान, कतर, कुवैत जैसे देशों से लगभग 17.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसी प्रकार कुल LNG आयात का लगभग 40 फीसदी कतर से खरीदता है। इस प्रकार भारत की जरूरत का लगभग आधा फीसदी हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से आता है। ऐसे में मिडिल-ईस्ट संकट से भारत में ऊर्जा संकट बना हुआ है।

वैश्विक व्यापार रूट होगा प्रभावित-

कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 25-30 प्रतिशत हिस्सा हिंद महासागर से होकर गुजरता है। अगर यह युद्ध लंबे समय तक चला तो ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होगा। एक तरफ रूस-यूक्रेन संघर्ष चल रहा है वहीं दूसरी ओर मिडिल-ईस्ट में भी युद्ध शुरू होने से दुनिया में मंहगाई बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं।

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