Manipur Violence : मणिपुर में हिंसा का सिलसिला एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है. तमेंगलोंग जिले के टोलन गांव में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने एक परिवार को निशाना बनाया. गोलीबारी में सेनेह सिंगसिट और उनकी पत्नी लिंगजंगाई की मौत हो गई, जबकि उनका छह साल का बेटा घायल है. बच्चे के शरीर में फंसी गोली निकालने के लिए सर्जरी की जानी है.
जानकारी के अनुसार, हमले में लिंगजंगाई की मौके पर ही मौत हो गई थी.. वहीं गंभीर रूप से घायल सेनेह सिंगसिट ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस हमले को लेकर कुकी नागरिक समूहों ने NSCN(IM) और ZUF(K) से जुड़े नागा उग्रवादियों पर आरोप लगाया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
चावल लेकर जा रहे लोगों पर घात लगाकर हमला
वहीं, मणिपुर में एक अन्य घटना नोनी जिले में सामने आई. यहां अज्ञात बंदूकधारियों ने चावल लेकर जा रहे लोगों के एक समूह पर कथित तौर पर घात लगाकर हमला किया. गोलीबारी में जूली गंगटे और थांगरोएल गंगटे की मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद एक महिला के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है.
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में दो निर्दोष नागरिकों की हत्या पर दुख जताया गया. मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने कहा कि आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती और ऐसी घटनाओं के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए. सरकार ने मामले को गंभीरता से लेने की बात कही है.
कुकी-नागा संघर्ष का पुराना इतिहास
मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव का इतिहास पुराना है. 1992 में शुरू हुआ कुकी-नागा जातीय संघर्ष करीब छह साल चला था, जिसमें 1,000 से अधिक लोगों के मारे जाने की बात सामने आई थी. वहीं 2023 में शुरू हुई कुकी-मैतेई हिंसा में भी 260 से अधिक लोगों की मौत हुई.
इस साल मई में कांगपोकपी जिले के एक गांव से नागा समुदाय के छह लोगों को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने की घटना सामने आई थी. जून में कुकी बस्ती के पास उनके शव बरामद होने की जानकारी सामने आई थी.
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