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BRICS Summit में भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी-जिनपिंग मुलाकात से बदलेंगे रिश्तों के समीकरण

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक पर सभी की नजरें रहेंगी। गलवान विवाद के बाद यह दोनों नेताओं की पहली भारत में मुलाकात हो सकती है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

BRICS Summit 2026 : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत दौरे पर आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS सम्मेलन में कई बड़े देशों के नेता शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक की संभावना जताई जा रही है।

गलवान हिंसा के बाद पहली संभावित मुलाकात

अगर मोदी और जिनपिंग के बीच बैठक होती है, तो यह जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत में दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी, जबकि चीन ने अपने चार सैनिकों के मारे जाने की जानकारी दी थी।

सीमा विवाद और व्यापार पर हो सकती है चर्चा

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के अलावा व्यापार और आर्थिक मुद्दे भी अहम रहेंगे। भारत लंबे समय से चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही रेयर अर्थ मैग्नेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

NSA अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद बढ़ी बातचीत

इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अगस्त में चीन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की थी। इस बैठक को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

BRICS में भारत की अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ पर फोकस

इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। संगठन में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।

भारत BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत सप्लाई चेन पर जोर दे रहा है। सम्मेलन को व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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