Punjab

लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे चुन्नी लाल भगत, ऐसे नेता, जिनके दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले रहे

वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत के निधन से पंजाब ने एक अनुभवी और जनसेवा को समर्पित नेता खो दिया। 93 वर्ष की उम्र में उन्होंने राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनता से जुड़े रहने की मिसाल कायम की। विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने अपने कार्य और सिद्धांतों से अलग पहचान बनाई।

Chunni Lal Bhagat Shradhanjali Sabha : 93 वर्ष की आयु में वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत के निधन से पंजाब ने अपने एक दृढ़, विनम्र और सिद्धांतों पर चलने वाले जननेता को खो दिया है। पंजाब की राजनीति के एक प्रमुख चेहरे और दोआबा में दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता चुन्नी लाल भगत अपने पीछे नैतिक शासन, जमीनी स्तर पर लोगों के साथ गहरे संबंध और सादगी से जनता की सेवा करने में बिताए जीवन की विरासत छोड़ गए हैं।

अपने दशकों लंबे राजनीतिक सफर के दौरान चुन्नी लाल भगत विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से प्रेरित रहे। साधारण शुरुआत से प्रदेश में महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों तक पहुंचने वाले चुन्नी लाल भगत ने पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अपने खास शांत और गरिमापूर्ण अंदाज में किया।

आखिर में जो बचता है, वह है आपका काम

सार्वजनिक जीवन के दौरान चुन्नी लाल भगत अपने बेदाग रिकॉर्ड के लिए जाने जाते थे। वह हमेशा इस संकल्प पर कायम रहे कि ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वह कहते थे, ‘‘पद और ताकत लोगों द्वारा दिए गए अस्थायी अधिकार हैं। आखिर में जो बचता है, वह है आपका काम, आपका चरित्र और यह कि आपने उन लोगों की कितनी ईमानदारी से सेवा की, जिन्होंने आप पर भरोसा किया।’’

उनका मुख्य कर्तव्य आम नागरिकों की बात सुनना

उनका राजनीतिक सफर जालंधर और पूरे दोआबा क्षेत्र के विकास से गहराई से जुड़ा हुआ था। जालंधर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे चुन्नी लाल भगत पार्टी की सीमाओं से परे लोगों के लिए अपना घर और कार्यालय हमेशा सुलभ रखने के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। वह अक्सर इस बात पर जोर देते थे कि उनका मुख्य कर्तव्य आम नागरिकों की बात सुनना है और उन्होंने अपने दशकों लंबे कार्यकाल के दौरान इस परंपरा को लगातार कायम रखा।

समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक लाभ

जन प्रशासन के प्रति अपने दृष्टिकोण पर बात करते हुए पूर्व मंत्री शहरी विकास और जनस्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में पारदर्शिता और समानता की आवश्यकता पर जोर देते थे। स्थानीय निकाय और चिकित्सा शिक्षा विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने नगर सेवाओं को मजबूत करने, सफाई व्यवस्था में सुधार करने और जरूरतमंद क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की वकालत की। वह अक्सर पार्टी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को याद दिलाते थे कि नीतिगत उपायों के माध्यम से समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक लाभ पहुंचना चाहिए।’

राजनीतिक विरोधियों से भी हासिल किया सम्मान

अपनी प्रशासकीय उपलब्धियों के अलावा चुन्नी लाल भगत को अपने समुदाय और पार्टी में सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता के तौर पर याद किया जाता है। राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में भी अपने शांत स्वभाव और नपे-तुले शब्दों के कारण उन्होंने सहयोगियों के साथ-साथ राजनीतिक विरोधियों से भी सम्मान हासिल किया। वह राजनीति को निजी इच्छाओं की पूर्ति का साधन नहीं, बल्कि हाशिये पर रह रहे समुदायों के कल्याण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने की नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखते थे।

पिता के नक्श-ए-कदम पर चल रहे मोहिंदर भगत

उनके निधन की खबर फैलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें समर्पण तथा जनसेवा का मजबूत स्तंभ बताया। उनका जीवन विनम्रता, कड़ी मेहनत और अटूट नैतिकता पर आधारित शासन के एक दौर की याद दिलाता है। पंजाब की राजनीति में चुन्नी लाल भगत के योगदान और जालंधर के लोगों के प्रति उनकी अटूट सेवा भावना ने प्रदेश के लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी है। जनसेवा की इस शानदार परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र मोहिंदर भगत भी अपने पिता के नक्श-ए-कदम पर चल रहे हैं और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में लोगों की सेवा कर रहे हैं।

दिवंगत नेता के असाधारण जीवन को सम्मान देने और सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चुन्नी लाल भगत के निमित्त श्रद्धांजलि सभा रविवार, 20 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक एम.एस. फार्म, बस्ती पीर दाद, जालंधर में आयोजित की जाएगी।

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