UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है. इसी बीच लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका की मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है. दोनों नेताओं के बीच सपा मुख्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई. बैठक के बाद छात्र, युवा, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच भविष्य में किसी साझा मंच की संभावनाओं को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. हालांकि, फिलहाल सपा और CJP की ओर से किसी गठबंधन या राजनीतिक समझौते का ऐलान नहीं किया गया है.
युवाओं की मांगों का समर्थन
लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में हुई इस बैठक में आशुतोष रांका के साथ उनके सात सहयोगी भी मौजूद बताए गए. बातचीत में छात्र और युवाओं से जुड़े विषय प्रमुख रहे. इस दौरान CJP की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के समय समाजवादी पार्टी के नेताओं और सांसदों से मिले समर्थन के लिए अखिलेश यादव का आभार जताया गया.
सपा सांसद डिंपल यादव समेत पार्टी के कई नेताओं ने उस आंदोलन के दौरान युवाओं की मांगों का समर्थन किया था. सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद के मुताबिक, रांका इसी समर्थन के लिए धन्यवाद देने अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे थे.
सपा ने राजनीतिक गठजोड़ से किया इनकार
फखरुल हसन चांद ने कहा कि आंदोलन के दौरान समाजवादी पार्टी ने युवाओं के मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाया था. डिंपल यादव भी इन मुद्दों को लेकर सक्रिय रही थीं. इसी के लिए CJP की ओर से सपा नेतृत्व का आभार जताया गया. सपा ने साफ किया है कि बैठक के दौरान किसी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई. पार्टी ने इस मुलाकात को किसी संभावित राजनीतिक गठजोड़ से जोड़ने से भी इनकार किया है.
शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर दोनों की आवाज
आशुतोष रांका और CJP पिछले कुछ समय से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं. नीट पेपर लीक, स्कूलों की स्थिति और रोजगार जैसे विषयों पर पार्टी अपनी आवाज उठाती रही है.
वहीं, समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी, पेपर लीक और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधती रही है. ऐसे में दोनों पक्षों के मुद्दों में कुछ समानता जरूर दिखाई देती है.
Gen-Z वोटरों पर भी नजर
आपको बता दें कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में युवा और पहली बार मतदान करने वाले वोटरों की भूमिका अहम मानी जा रही है. राजनीतिक दल लगातार इस वर्ग तक अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटे हैं.
अखिलेश यादव भी शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े सवालों को लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाते रहे हैं. ऐसे में छात्र आंदोलनों से जुड़े नेताओं और संगठनों के साथ संवाद को उनकी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. फिलहाल मुलाकात के बाद राजनीतिक गठबंधन की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस बैठक ने सियासी चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है.
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