
Auto News : डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के चलते आज कार खरीदना-बेचना पहले से आसान हो गया है, लेकिन इसी सुविधा के साथ ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। खासकर सेकंड-हैंड कारों की खरीदारी में जालसाज अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये ठग मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर खरीदारों को जल्द निर्णय लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
ओडोमीटर में हेरफेर कर बढ़ाई जाती है कीमत
सबसे आम धोखाधड़ी कार के किलोमीटर मीटर से जुड़ी होती है। कई बार डिजिटल ओडोमीटर से छेड़छाड़ कर अधिक चली हुई गाड़ी को कम किलोमीटर की दिखाया जाता है। इससे वाहन की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कार की सर्विस हिस्ट्री जरूर जांचें। यदि गाड़ी पुरानी है, टायर घिसे हुए हैं, लेकिन मीटर पर कम रीडिंग दिखाई दे रही है, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
बाढ़ या दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों की री-सेलिंग
कई बार पानी में डूबी या बड़े हादसे में क्षतिग्रस्त हुई गाड़ियों को बाहरी रूप से ठीक कर बेच दिया जाता है। ऐसी कारें देखने में नई लग सकती हैं, लेकिन इनके इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में अंदरूनी नुकसान हो सकता है, जो कुछ समय बाद सामने आता है।
चोरी के मामलों में जीपीएस ट्रैकिंग का इस्तेमाल
एक नया और गंभीर तरीका यह है कि कुछ लोग वाहन बेचने से पहले उसमें गुप्त जीपीएस ट्रैकर लगा देते हैं। बिक्री के बाद डुप्लीकेट चाबी के जरिए गाड़ी की लोकेशन ट्रैक कर उसे चोरी कर लिया जाता है। इसलिए खरीदते समय गाड़ी की पूरी जांच और किसी भी संदिग्ध डिवाइस की जांच जरूरी है।
दस्तावेजों में गड़बड़ी से भी रहें सावधान
कुछ मामलों में चोरी की गाड़ियों के इंजन या चेसिस नंबर में बदलाव कर उन्हें वैध दस्तावेजों के साथ बेचा जाता है। कई बार टोटल लॉस घोषित वाहनों को भी दूसरी गाड़ी के दस्तावेजों के साथ बेच दिया जाता है, जिससे भविष्य में कानूनी परेशानी हो सकती है।
ऑनलाइन विज्ञापन में झांसा देने की रणनीति
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आकर्षक कीमत दिखाकर ग्राहकों को बुलाया जाता है। जब ग्राहक मौके पर पहुंचता है, तो बताया जाता है कि वह गाड़ी पहले ही बिक चुकी है और फिर उसे महंगे विकल्प लेने के लिए दबाव डाला जाता है।
सुरक्षित खरीदारी के लिए जरूरी सावधानियां
ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार सेकंड-हैंड कार खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- भरोसेमंद मैकेनिक के साथ जाएं – वह इंजन, पेंट और तकनीकी स्थिति की जांच कर सकता है।
- ऑनलाइन वेरिफिकेशन करें – वाहन पोर्टल या संबंधित ऐप पर गाड़ी का विवरण जांचें।
- टेस्ट ड्राइव जरूर लें – कम से कम कुछ किलोमीटर चलाकर ब्रेक, सस्पेंशन और एसी की जांच करें।
- कागजी प्रक्रिया पूरी होने तक भुगतान न करें – एनओसी और ट्रांसफर दस्तावेज मिलने के बाद ही अंतिम भुगतान करें।
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