5 Priorities One Mission : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, पंजाब का ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ (नशे के खिलाफ़ जंग) अब पारंपरिक पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर नशे के खिलाफ एक व्यापक पांच-सूत्रीय लड़ाई बन गया है। इसमें पुलिस, शिक्षक, कम्युनिटी वॉलंटियर, युवा और स्वास्थ्य कर्मियों को एक साथ लाकर नशे के सप्लाई नेटवर्क पर प्रहार करने, नशे की लत को रोकने, रिपोर्टिंग को मज़बूत करने और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए समय पर इलाज सुनिश्चित करने का काम किया जा रहा है।
संदेश साफ़ है, पंजाब में ड्रग्स की समस्या से सिर्फ़ पुलिस थानों के ज़रिए नहीं लड़ा जाएगा। यह लड़ाई अब गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, समुदायों और स्वास्थ्य केंद्रों तक ले जाई जा रही है। जहां एक तरफ़ पुलिस सप्लाई नेटवर्क को तोड़ रही है और ड्रग्स बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ़ समुदाय के प्रतिनिधि ज़मीनी स्तर पर निगरानी मज़बूत कर रहे हैं, शिक्षक लत लगने से पहले ही जोखिम की पहचान कर रहे हैं, युवा, किशोरों और नौजवानों में ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता, मज़बूती और सेहतमंद आदतों को बढ़ावा दे रहे हैं, और स्वास्थ्यकर्मी ठीक होने का रास्ता दिखा रहे हैं।
इसका मकसद ड्रग्स बेचना मुश्किल बनाना, ड्रग्स की तस्करी की रिपोर्ट करना आसान बनाना, युवाओं को नशे की लत में फंसाना मुश्किल बनाना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए इलाज पाना आसान बनाना है। यह पांच-सूत्रीय ढांचा कानून लागू करने और रोकथाम को पुनर्वास (Rehabilitation) के बराबर महत्व देता है, और यह मानता है कि ड्रग्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी ज़रूरी है।
पुलिस की कार्रवाई: सप्लाई चेन को तोड़ना
‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान को लागू करने में पुलिस की भूमिका सबसे अहम है। मार्च 2025 और सितंबर 2026 के बीच, पंजाब की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने 61,824 FIR दर्ज कीं और 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया।
इस पहल के शुरू होने के बाद से अब तक भारी मात्रा में नशीले पदार्थ ज़ब्त किए गए हैं, जिनमें 3918 किलोग्राम हेरोइन, 991 किलोग्राम अफ़ीम, 47 टन पोस्ता भूसा, 1416 किलोग्राम गांजा और 65 लाख टैबलेट व कैप्सूल शामिल हैं।
इसी दौरान, पंजाब पुलिस ने 79,293 जनसभाएं आयोजित कीं, जिससे नशा-विरोधी अभियान सीधे समुदायों तक पहुंचा और नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में जन-भागीदारी मजबूत हुई।
शिक्षक: लत को जड़ जमाने से पहले ही रोकना
‘बिग 5’ का दूसरा स्तंभ रोकथाम पर केंद्रित है, क्योंकि नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई तब शुरू नहीं की जा सकती जब कोई युवा पहले ही इनकी लत का शिकार हो चुका हो।
ट्रेनिंग पाए हुए टीचर 3,600 स्कूलों में 7.5 लाख स्टूडेंट्स को ड्रग्स के खिलाफ़ 14 हफ़्ते का कोर्स पढ़ा रहे हैं। सरकार सभी हाई-स्कूल और सीनियर सेकेंडरी टीचर को भी चरणबद्ध तरीके से जागरूक कर रही है ताकि वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी, नशीले पदार्थों के सेवन के प्रति संवेदनशीलता के शुरुआती संकेतों और मदद के तरीकों की पहचान कर सकें।
पहले चरण में, सरकार 13 ज़िलों के लगभग 25,000 शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की योजना बना रही है; इनमें से अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में 7,000 शिक्षकों को पहले ही जागरूक किया जा चुका है। इस तरीके का मकसद यह पक्का करना है कि शिक्षक सिर्फ क्लासरूम में पढ़ाने वाले ही न रहें, बल्कि नशे की लत के खिलाफ सुरक्षा की एक अतिरिक्त कड़ी भी बनें। वे खतरे के संकेतों को पहचान सकें और जोखिम वाले स्टूडेंट्स को सही मदद दिला सकें।
युवा और साथी नेटवर्क: नशीले पदार्थों के आस-पास के सामाजिक माहौल को बदलना
तीसरा स्तंभ नशीली दवाओं के दुरुपयोग के सबसे मुश्किल पहलुओं में से एक पर ध्यान देता है, साथियों का असर और सामाजिक स्वीकार्यता। इस पहल के तहत स्कूल और कॉलेज के कार्यक्रमों में साथियों की भागीदारी, ठीक हो चुके लोगों और युवाओं के नेतृत्व वाली गतिविधियों का इस्तेमाल तेज़ी से किया जा रहा है, ताकि नशीली दवाओं को मना करना सामाजिक रूप से आसान हो सके और ठीक होने की प्रक्रिया से जुड़ी सामाजिक बदनामी कम हो।
स्कूलों में छात्रों को व्यस्त रखने के लिए साल भर की एक्टिविटी के कैलेंडर तैयार किए गए हैं, वहीं कल्चरल फेस्टिवल, मेंटल-हेल्थ क्लब और स्पोर्ट्स एक्टिविटी कॉलेज के छात्रों को बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
रणनीति सीधी है, ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ़ युवाओं को यह बताकर नहीं जीती जा सकती कि उन्हें क्या नहीं करना है। पंजाब स्पोर्ट्स, कल्चर, साथियों के साथ जुड़ाव और कम्युनिटी की भागीदारी के ज़रिए मज़बूत विकल्प तैयार कर रहा है।
सामुदायिक सतर्कता- लड़ाई को ज़मीनी स्तर पर ले जाना
चौथी परत ड्रग-विरोधी अभियान में आम नागरिकों की भूमिका को मज़बूत करती है। इस अभियान ने ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा का एक मज़बूत नेटवर्क भी तैयार किया है। सितंबर 2026 तक, लगभग 1.25 लाख सदस्य करीब 15,000 विलेज और वार्ड डिफेंस कमेटियों (VDC) से जुड़ चुके थे, जिससे पंजाब के गांवों और शहरी वार्डों में ड्रग्स के ख़िलाफ़ सतर्कता का दायरा बढ़ा है।
50,000 से ज़्यादा VDC सदस्यों को ‘नशा मुक्ति ऐप’ के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही, कम्युनिटी प्रतिनिधि न सिर्फ़ ड्रग्स की तस्करी के बारे में, बल्कि मदद चाहने वाले पीड़ितों के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं, जिससे सरकारी अधिकारी सही समय पर कार्रवाई कर पाते हैं।
1 मार्च, 2025 को ‘सेफ पंजाब’ WhatsApp हेल्पलाइन (97791-00200) के शुरू होने के बाद से, नागरिकों से मिली 51,000 से ज़्यादा जानकारियों की मदद से पुलिस ने ड्रग्स से जुड़े मामलों में 25,000 से ज़्यादा गिरफ्तारियां की हैं।
इसका मकसद यह पक्का करना है कि ड्रग्स बेचने वाले छिपकर अपना काम न कर सकें और नशे की लत से जूझ रहे परिवारों को सरकारी मदद पाने का रास्ता मिल सके।

स्वास्थ्य और पुनर्वास- नशे की लत से उबरने का रास्ता
पांचवां स्तंभ यह मानता है कि केवल प्रवर्तन से व्यसन का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए पंजाब ने मादक द्रव्यों के सेवन से जूझ रहे लोगों को उपचार की राह आसान बनाने के लिए अपने उपचार ढांचे का विस्तार किया है। पंजाब में अभी 547 OOAT सेंटर, 219 नशा-मुक्ति केंद्र और 91 रिहैबिलिटेशन सेंटर हैं।
‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू होने के बाद से सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया गया है, स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है, और इलाज केंद्रों पर मरीज़ों को ठीक होने के दौरान व्यस्त रखने के लिए स्किलिंग और क्रिएटिव गतिविधियां शुरू की गई हैं।
लोगों की देखभाल में हुई बढ़ोतरी
इलाज और इस समस्या से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने पर ज़्यादा ध्यान दिए जाने के कारण, संस्थागत देखभाल लेने वाले लोगों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में भर्ती होने वालों की संख्या 2024 में 12,200 से ज़्यादा थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 34,000 हो गई, यानी इसमें 170% से ज़्यादा की वृद्धि हुई है।
ये आंकड़े एक बड़े बदलाव को दिखाते हैं, जो लोग सालों से नशे की लत से जूझ रहे थे, वे अब सरकारी केंद्रों में इलाज कराने के लिए ज़्यादा संख्या में आगे आ रहे हैं।
बिग 5- ड्रग्स के खिलाफ एक समन्वित लड़ाई
पंजाब के ‘बिग 5’ (Big 5) के पीछे यही सोच है: कानून लागू करने का काम अकेले नहीं हो सकता, और आसानी से इलाज की सुविधा के बिना नशा रोकने की कोशिशें सफल नहीं हो सकतीं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ (Yudh Nashean Virudh) एक ऐसा सिस्टम बना रहा है जिसमें पुलिस स्टेशन, गांव, स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्र अलग-अलग मोर्चे नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ एक ही मुहिम के आपस में जुड़े हुए हिस्से हैं।
मकसद साफ़ है, ड्रग्स की सप्लाई को खत्म करना, रिपोर्टिंग को मजबूत करना, युवाओं को नशे की लत से बचाना, समुदायों को एकजुट करना और ठीक होने का एक भरोसेमंद रास्ता देना।
इसलिए, भगवंत मान सरकार के लिए ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ़ नारों या बयानों तक सीमित नहीं है। यह ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को ज़मीनी स्तर पर ले जाने और उसे जारी रखने के लिए ज़रूरी एनफोर्समेंट मशीनरी, ज़मीनी नेटवर्क, बचाव के सिस्टम और हेल्थकेयर क्षमता को तैयार करने के बारे में है।
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