
France Protests : यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, आवास संकट, पेंशन में कटौती, शिक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार और युद्ध के विरोध में लोगों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। शनिवार को फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी। कुछ इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई।
फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान तनाव, करीब 1,000 लोग हिरासत में
फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर हालात तनावपूर्ण हो गए। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, देशभर में करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकार ने प्रदर्शनों में लगभग 4.10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या करीब 8 लाख बताई।
राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालात पर नजर रखने के लिए पुलिस हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए।
वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली के दौरान फ्रांस में पैदा हुए हालात के लिए वहां की आव्रजन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
अल्बानिया में भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन
अल्बानिया की राजधानी तिराना सहित कई शहरों में छात्रों की अगुवाई में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने ट्यूशन फीस घटाने, शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने और प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी। सरकारी इमारतों और बैंकों को भी निशाना बनाया गया। भीड़ की ओर से पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके गए, जिसके जवाब में दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया।
इटली के कई शहरों में मार्च, सुरक्षा व्यवस्था सख्त
इटली के मिलान, रोम, ट्यूरिन, नेपल्स और फ्लोरेंस समेत कई शहरों में युवाओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर मार्च निकाला। पुलिस ने आठ शहरों से नौ लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 371 लोगों को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया। इनमें 110 नाबालिग भी शामिल थे।
राजधानी रोम में प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह ने ऐतिहासिक कोलोसियम में घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। हिंसा की आशंका को देखते हुए मिलान के फैशन क्षेत्र में दुकानदारों ने अपनी दुकानों की खिड़कियों पर सुरक्षा बोर्ड लगा दिए।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
स्पेन में पेंशन और बढ़ते किराये के खिलाफ नाराजगी
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों पेंशनभोगियों और अन्य नागरिकों ने सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाने, न्यूनतम पेंशन को न्यूनतम वेतन के बराबर करने और महिला-पुरुष पेंशन के बीच अंतर खत्म करने की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने पेंशन के निजीकरण का विरोध किया।
यह प्रदर्शन आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले हुआ। स्पेन में बढ़ते मकान किराये और घरों की कीमतों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आवास लगातार महंगा होने से आम लोगों के लिए घर खरीदना और किराये पर रहना मुश्किल होता जा रहा है।
पुर्तगाल में आवास संकट के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने महंगाई और आवास संकट के विरोध में मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि युवाओं के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना लगातार कठिन होता जा रहा है। मार्च के बाद लोगों ने रॉसियो स्क्वायर में 100 से अधिक टेंट लगाकर विरोध जारी रखा। पुलिस ने रविवार तड़के इन टेंटों को बलपूर्वक हटा दिया।
प्रदर्शनकारियों ने नए आवास कानून को वापस लेने की मांग की। उनका विरोध उन प्रावधानों को लेकर था, जिनसे किरायेदारों को बेदखल करना आसान होने और नए किराया समझौतों पर लगी सीमा हटने की आशंका जताई जा रही है।
पुर्तगाल में आवास की समस्या गंभीर होती जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से घरों की कीमतें दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। बैंक ऑफ पुर्तगाल के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग तीन लाख घरों की कमी है।
महंगाई और जीवनयापन की लागत बना विरोध का बड़ा मुद्दा
यूरोप के इन पांच देशों में हुए प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग स्थानीय मुद्दे रहे, लेकिन महंगाई, रोजगार, आवास की उपलब्धता और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष प्रमुखता से सामने आया। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक होने के बाद सरकारों को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी। इन घटनाओं ने आम लोगों की आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर बढ़ती नाराजगी को उजागर किया।
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