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दुबई में बेटे की दो महीने पहले मौत, अब मिली जानकारी, महिला ने SC में लगाई ये गुहार

Supreme Court : रोजी-रोटी और परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी करने गए दुबई में एक भारतीय युवक की मौत हो गई। अब उस युवक का शव भारत लाने के लिए युवक की मां ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने कोर्ट से मांग की है कि उसके बेटे को भारत लाया जाए जिससे वह भारतीय रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर सके। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है और अगली तारीख 16 मार्च तय की है।

अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछे सवाल

यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने पेश किया गया, जहां सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से कई सवाल पूछे। जिसमें सबसे प्रमुख सवाल यह था कि बेटे की मौत कब और कैसे हुई। अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में मौत की तारीख और कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि महिला को 4 फरवरी को दूतावास से बेटे की मौत की सूचना मिली थी, जबकि मौत 4 दिसंबर को हुई थी।

कोर्ट ने पूछा – हादसे की जानकारी कैसे मिली?

अदालत ने यह भी सवाल किया कि महिला को इस जानकारी का पता कैसे चला। वकील ने बताया कि महिला विधवा है और उसका बेटा दुबई में मजदूरी करता था। महिला को दो महीने बाद बेटे की मौत की जानकारी मिली, लेकिन यह भी नहीं बताया गया कि मौत का कारण क्या था। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि बिना पूरी जानकारी के अदालत कैसे निर्णय ले सकती है।

महिला का दुबई में कोई परिचित नहीं

याचिका में यह मांग की गई थी कि बेटे की पार्थिव देह भारत लाई जाए, ताकि मां अंतिम संस्कार और धार्मिक विधियाँ पूरी कर सके। महिला का कहना था कि दुबई में उसका कोई परिचित नहीं है, जो इस प्रक्रिया में मदद कर सके। अदालत ने पूछा कि क्या दुबई में कोई अन्य व्यक्ति इस मामले में मदद कर सकता है, जिस पर वकील ने नकारात्मक उत्तर दिया।

केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। इस मामले ने उन परिवारों की समस्याओं को उजागर किया है, जिनके सदस्य विदेश में काम करते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करते हैं।

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