Middle East Tension : मिडिल ईस्ट में विवाद चरम पर है। अमेरिका-ईरान युद्ध आए दिन विकराल रुप ले रहा है। कई दौर की वार्ता के बाद भी दोनों देशों में विवाद थम नहीं रहा। ईरान आधुनिक और पूरी शक्ति से अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। वहीं अब युद्ध में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की एंट्री हो गई है। बता दें कि हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को यमन और सऊदी अरब में एक साथ कई बड़े हमले किए। जिसमें 58 सैनिकों की मौत और कई अन्य लोग गंभीर रुप से घायल हो गए।
ड्रोन हमलों में मरने वालों की संख्या
यमन में हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है। हमलों में दर्जनों सैनिक घायल भी हुए हैं। वहीं, सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र में हुए हमले में 4 साल के बच्चे समेत 11 नागरिक घायल हुए हैं। हमलों के बाद नजरान के कई हिस्सों में आग लग गई।
यमन में सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया है। हमले पर प्रतिक्रिया करते हुए यमन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले का जवाब सही समय और सही जगह पर दिया जाएगा।
ईरान-अमेरिका में हो सकता है समझौता
ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान-अमेरिका के बीच समझौता हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा (Draft) आखिरी चरण में है।
होर्मुज स्ट्रेट से अब जहाजों की आवाजाही लगातार घटती जा रही है, जानकारी के आधार पर पहले जहां जहाज़ों का जमावड़ा बना रहता था, वहां अब केवल 2 से 4 जहाज गुजर पा रहे हैं। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है।
बढ़ते तनाव के साथ हमले लगातार तेज
दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या सर्विस चार्ज न लगाया जाए। इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई में इसका बड़ा असर देखने को मिलेगा।
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के साथ हूती हमले तेज कर रहा है। इसकी वजह ईरान और हूतियों के बीच लंबे समय से बने रिश्ते हैं।
यमन का एक शिया विद्रोही संगठन
हूती, जिसे अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, यमन का एक शिया विद्रोही संगठन है। साल 2014 में इस संगठन ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से हूती विद्रोही यमन की सरकार और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
अमेरिका और सहयोगी देशों का आरोप
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, ड्रोन और मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराता है। उनका दावा है कि ईरान के समर्थन से हूती क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाता है।
इजराइल की ओर से ईरान पर सैन्य दबाव
जब भी अमेरिका या इजराइल की ओर से ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ता है, तो हूती संगठन अपने हमले तेज कर देता है। इसके पीछे रणनीति यह बताई जाती है कि विरोधी देशों को कई मोर्चों पर व्यस्त रखा जाए, जिससे ईरान पर पड़ने वाला दबाव कम हो सके।
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