Punjab News : पंजाब ने गंभीर रूप से सिंथेटिक नशे (ओपिओइड) से जूझ रहे लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नशा छुड़ाऊ उपचार मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (एमएमटी) की शुरुआत की है. मेथाडोन की शुरुआत राज्य की नशों के विरुद्ध उपचार-केंद्रित रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
अब तक राज्य में नशा पीड़ितों का इलाज मुख्य रूप से 500 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्रों के माध्यम से ब्यूप्रेनोर्फिन आधारित ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी से किया जाता था. इस थेरेपी में हानिकारक ओपिओइड की जगह चिकित्सकीय निगरानी के तहत नियंत्रित दवाओं का उपयोग करके नशे के शिकार मरीजों का इलाज किया जाता है. अब, मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी उन मरीजों के लिए उपचार का एक अतिरिक्त विकल्प मुहैया कराएगी, जो लंबे समय से सिंथेटिक नशों पर निर्भर हैं और जिन पर मौजूदा इलाज ज्यादा असरदार साबित नहीं हुए हैं.
कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी
इस समय पंजाब में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक चालू हैं. ये सरकारी मेडिकल कॉलेज फरीदकोट, सिविल अस्पताल लुधियाना, सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला और गुरदासपुर, मोहाली तथा जालंधर के जिला अस्पतालों में स्थापित किए गए हैं. पंजाब सरकार आने वाले महीनों में छह और एम.एम.टी. केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी.
मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार लाएगी
इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि मेथाडोन सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ का हिस्सा है, जिसमें खास तौर पर उन लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है, जो सिंथेटिक नशे पर निर्भर हैं और जिनमें फिर से नशे की ओर लौटने का खतरा अधिक होता है, उन्होंने कहा, ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से सिंथेटिक नशों के आदी लोगों के लिए प्रभावी उपचार का विकल्प है. यह समग्र उपचार प्रणाली मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार लाएगी और उन्हें अपने परिवार एवं समाज में सफलतापूर्वक पुनः स्थापित होने में मदद करेगी.’
मरीजों को हर रोज क्लीनिक आना होगा
नए क्लीनिक विशेष आउटपेशेंट सुविधाओं के रूप में काम करेंगे, जहाँ मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में मेथाडोन थेरेपी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, मनोचिकित्सा सलाह, पुनः नशे की लत से बचाव संबंधी सेवाएं, पारिवारिक काउंसलिंग और नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी दी जाएगी.
मरीजों को अपनी निर्धारित खुराक लेने के लिए हर रोज क्लीनिक आना होगा, जहाँ उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में दवा दी जाएगी. दवा की हर खुराक डॉक्टर की निगरानी में दी जाएगी ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके और सही उपचार सुनिश्चित किया जा सके.
मेथाडोन थेरेपी क्या है?
मेथाडोन, ओपिओइड यूज डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों, जैसे कि हेरोइन की लत से जूझ रहे मरीजों के लिए वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित एक प्रभावी उपचार है. मेथाडोन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की मॉडल सूची में ओपिओइड यूज डिसऑर्डर के उपचार के लिए भी शामिल किया गया है. यह दवा प्रशिक्षित डॉक्टरों की निगरानी में एक समग्र उपचार कार्यक्रम के तहत दी जाती है.
फिर से नशा लेने की तलब महसूस नहीं होती
मेथाडोन मस्तिष्क के उन्हीं ओपिओइड रिसेप्टर्स पर काम करती है, जिन पर हेरोइन और अन्य सिंथेटिक नशे असर करते हैं. निर्धारित खुराक के अनुसार यह नशे की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) को नियंत्रित करती है, नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षणों से राहत देती है और ओपिओइड के प्रति सहनशीलता पैदा करती है, जिस कारण फिर से नशा लेने की तलब महसूस नहीं होती. इससे मरीज की सेहत स्थिर रहती है और वह उपचार, रोजगार और पारिवारिक जीवन में अधिक सुचारू ढंग से हिस्सा लेने लगता है.
मरीज सामान्य और स्थिर जीवन बिता सकते हैं
समय के साथ मरीज की सेहत की स्थिति और उपचार में हुई प्रगति को ध्यान में रखते हुए मेथाडोन की खुराक धीरे-धीरे कम की जा सकती है. चूंकि मरीज हर रोज क्लीनिक में चिकित्सकीय निगरानी में दवा लेते हैं, इसलिए इसके दुरुपयोग की संभावना बहुत कम रहती है.
मेथाडोन लंबे समय तक असर करने वाली दवा है. इसकी रोजाना एक खुराक आम तौर पर लगभग 24 घंटों तक नशा छोड़ने के लक्षणों और नशे की तलब को नियंत्रण में रखती है, जिससे मरीज पूरा दिन सामान्य और स्थिर जीवन बिता सकते हैं.
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