
LPG Supply : मिडिल ईस्ट में जारी संकट के चलते सप्लाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए भारत सरकार ने तेल रिफाइनरियों को आपात निर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत रिफाइनरियों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध प्रोपेन व ब्यूटेन का अधिकतम उपयोग करने को कहा गया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की कमी न हो।
भारत की LPG जरूरत और आयात पर निर्भरता
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG आयातकों में शामिल है। देश में सालाना लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कुकिंग गैस की खपत होती है। कुल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है, जिसमें बड़ी मात्रा मिडिल ईस्ट से आती है। देश में करीब 33 करोड़ से अधिक सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं, जिनकी आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
सरकारी तेल कंपनियों को प्राथमिक जिम्मेदारी
सरकार ने निर्देश दिया है कि उत्पादित LPG की आपूर्ति मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को दी जाए, जो इसे घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी।
अमेरिका से आयात बढ़ा, नई आपूर्ति व्यवस्था
भारत ने हाल ही में अमेरिका से भी LPG आयात शुरू किया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अमेरिकी खाड़ी तट से 2026 अनुबंध वर्ष के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है, जिससे सप्लाई में विविधता लाई जा सके।
पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर संभावित असर
प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG उत्पादन में प्राथमिकता देने से पेट्रोकेमिकल उद्योग पर असर पड़ सकता है। कुछ उत्पादों जैसे अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन का उत्पादन घट सकता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बन सकता है।
घरेलू आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि मौजूदा परिस्थितियों में घरेलू रसोई गैस की निरंतर उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए रिफाइनरियों को उत्पादन रणनीति में बदलाव करना होगा।
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