धर्म

काशी के प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर की कहानी और महत्व, मुगल भी कर चुके हैं मंदिर पर हमला

Mahadev Temple : काशी, जिसे देवाधिदेव महादेव का निवास माना जाता है, अपने हर मंदिर की अनोखी दिव्यता और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है। इनमें से एक खास मंदिर है श्री कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, जो महादेव के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र से भी जुड़ा हुआ है। काशी के दक्षिणी हिस्से में स्थित यह प्राचीन शिवालय अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण खास है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद रावण वध से लगे ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए यहां महादेव के दर्शन किए थे।

मंदिर का इतिहास और धार्मिक महत्व

कर्दमेश्वर महादेव मंदिर को काशी का सबसे प्राचीन बचा हुआ शिव मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि कर्दम ऋषि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, इसी कारण इसे कर्दमेश्वर कहा गया। काशी पंचकोशी परिक्रमा के दौरान यह पहला प्रमुख स्थल है, और तीर्थयात्री यहीं से अपनी पवित्र यात्रा की शुरुआत करते हैं। मंदिर के शिखर के दर्शन मात्र से व्यक्ति को देव ऋण से मुक्ति मिलती है। किंवदंतियों के अनुसार, रावण वध के बाद राम को ब्रह्महत्या का दोष लगा, जिसके बाद गुरु वशिष्ठ की सलाह पर राम और सीता कर्दमेश्वर महादेव के दर्शन करने आए और पाप से मुक्ति पाई।

स्थापत्य और कला

मंदिर नागर शैली में निर्मित है और पंचरथ डिज़ाइन का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें गर्भगृह, महामंडप, अर्द्धमंडप, प्रदक्षिणा पथ और चबूतरा स्थित हैं। मंदिर पूर्व मुखी है और इसकी दीवारों पर नर्तकियों, संगीतकारों, सांपों और पौराणिक जीवों की नक्काशी देखने को मिलती है, जिन्हें 6वीं-7वीं शताब्दी का माना जाता है। मंदिर के पास स्थित कर्दम कुंड कहा जाता है कि कर्दम ऋषि के आंसुओं से बना था और बाद में 18वीं शताब्दी में रानी भवानी ने इसे फिर से संवार दिया।

ऐतिहासिक संरक्षण

कर्दमेश्वर महादेव मंदिर 12वीं सदी का माना जाता है और मुगलों के विनाशकारी हमलों से बचकर 17वीं सदी तक अपनी मूल संरचना बनाए रखा। यह काशी का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो अपनी ऐतिहासिक गरिमा के साथ आज भी खड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्राचीन व ऐतिहासिक स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1956 के तहत संरक्षित किया है।

दर्शन और यात्रा की जानकारी

मंदिर प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। सुबह, शाम और रात में आरती आयोजित होती है। प्रवेश नि:शुल्क है। दर्शन के लिए सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। मंदिर वैष्णो नगर कॉलोनी, कंचनपुर, कंदवा क्षेत्र में स्थित है। वाराणसी शहर से ऑटो, टैक्सी या प्राइवेट वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। वाराणसी जंक्शन या लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा लगभग 30-45 मिनट में मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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