MP News : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की मौत हो गई है। यह इलाका प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बन चुका है।
अब इस मामले ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ध्यान खींचा है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए इस जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। साथ ही मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने का निर्देश दिया है।
सरकार ने सही समाधान नहीं निकाला- याचिकाकर्ता
इस याचिका को एडवोकेट रितेश इनानी, पूर्व पार्षद महेश गर्ग और प्रमोद द्विवेदी ने एडवोकेट मनीष यादव के जरिए दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से कई लोग मर चुके हैं और सैकड़ों बीमार हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक इसका सही समाधान नहीं निकाला है।
कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
2 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को एक रिपोर्ट दी, जिसमें केवल चार मौतों का जिक्र था। जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी और कहा कि असली संख्या इससे बहुत अधिक है और अब यह आंकड़ा और बढ़ गया है। कोर्ट ने सरकार के इस रवैये पर कड़ी टिप्पणी की।
अदालत ने मुख्य सचिव ठहराया जिम्मेदार
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामले बहुत संवेदनशील होते हैं और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसलिए अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे जिम्मेदार मानते हुए उनकी अदालत में हाजिरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट इस मामले में सरकार की असली भूमिका, अब तक उठाए गए कदम और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की गहन समीक्षा करेगी।
ये भी पढ़ें- MGNREGA कमजोर, कानून-व्यवस्था ध्वस्त, BJP की G RAM G गरीबों और पंजाब पर हमला- मोहित मोहिंद्रा
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप









