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देश के किसानों पर कुदरत की मार, गर्मी, युद्ध और बेमौसम बारिश से फसल और आमदनी पर भरी चोट

Indian Farmers : देश के किसानों को इस समय तीनों तरफ से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में अचानक बदलाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बेमौसम बारिश ने फसलों पर भारी असर डाला है। अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी- लगभग हर प्रमुख फसल दबाव में है। इस स्थिति ने सिर्फ किसानों को नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को भी चिंता में डाल दिया है।

प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल तक नुकसान की संभावना

सबसे बड़ी चिंता गेहूं की पैदावार को लेकर है। फरवरी-मार्च का समय गेहूं के लिए बेहद अहम माना जाता है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं के दानों को कमजोर किया और हरजिंदर सिंह जैसे किसानों ने प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल तक नुकसान की संभावना जताई। हरियाणा में हालांकि अचानक हुई बारिश से कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन तापमान का असर कम रहा। बिहार और उत्तर प्रदेश में भी कुछ क्षेत्रों में गर्मी और बारिश का मिश्रित प्रभाव देखने को मिला है।

बाजार तक पहुंचने में होगी समस्या

पश्चिम एशिया की जंग से भारत के कृषि निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। बासमती चावल, प्याज, केला, अंगूर जैसे उत्पाद जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों में जाते हैं, अब बंदरगाहों पर फंसे हैं। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। खासकर रमजान और ईद के मौके पर मांग बढ़ने वाली उपज अब बाजार तक नहीं पहुंच पा रही।

फसल गिरने से उत्पादन घटेगा

इसके अलावा बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया। हरियाणा में गेहूं, सरसों और चना, महाराष्ट्र में गेहूं, तरबूज और प्याज सहित कई फसलें प्रभावित हुई हैं। कटाई के दौरान फसल गिरने से उत्पादन घटेगा और मजदूरी की लागत भी बढ़ जाएगी।

संकट से उबरने के लिए मदद की जरूरत

कुल मिलाकर इस महीने की गर्मी, युद्ध और बारिश ने किसानों की आय पर सीधा असर डाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति गंभीर है और किसानों को इस संकट से उबरने के लिए मदद की जरूरत है, वरना उत्पादन और आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है।

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