Vande Mataram Row : ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस के फैसले के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है. कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने तय किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ पहले दो छंद ही गाए जाएंगे. कांग्रेस ने अपने 1937 के फैसले को इसका आधार बताया है.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और 1937 में वंदे मातरम को लेकर लिए गए फैसले को दोहराया जा रहा है. शाह ने कहा कि देश की जनता को कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम के दो हिस्से किए और इसे मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़ते हुए कहा कि उस समय के फैसले ने देश के विभाजन की नींव रखी. शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस गलती को सुधारा है.
कांग्रेस ने 1937 के फैसले का दिया हवाला
कांग्रेस का कहना है कि वह वंदे मातरम को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य नेताओं के फैसले का पालन करेगी. पार्टी के मुताबिक उस समय राष्ट्रीय आयोजनों में वंदे मातरम के पहले दो छंद गाने की सिफारिश की गई थी.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले को निशाना बनाते हुए पार्टी की तुलना ‘नई मुस्लिम लीग’ से कर दी, उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वंदे मातरम के कथित अपमान को अब अपनी नीति बना लिया है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वंदे मातरम भारत का गौरव है और इसका पूरा संस्करण नहीं गाना भारत माता का अपमान है. वहीं, गिरिराज सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘मुस्लिम लीग’ की अगुवाई करने वाला बताया.
कांग्रेस ने भी किया पलटवार
वहीं, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अब कांग्रेस को वंदे मातरम पर सीख देने की कोशिश की जा रही है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख ऐतिहासिक नेताओं के विचारों के अनुरूप है.
इस पूरे विवाद के बीच वंदे मातरम अब एक बार फिर देश की सियासत के केंद्र में आ गया है.
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