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पैराग्वे में बैंक डूबने से मचा सियासी भूचाल, महाभियोग के बाद राष्ट्रपति पद से हटाए गए पेना, जानें पूरा मामला

Political Crisis : दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में एक बैंक के डूबने से ऐसा राजनीतिक संकट खड़ा हुआ कि राष्ट्रपति को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ गई. डिजिटल बैंक यूएनो बैंक के बंद होने के बाद लाखों लोगों की जमा पूंजी और पेंशन की रकम फंस गई. इस संकट की आंच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना तक पहुंची और संसद ने महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटा दिया. इतना ही नहीं, पद से हटाए जाने के कुछ ही मिनट बाद उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया.

शुक्रवार को पैराग्वे की संसद में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान हुआ. कुल 45 सांसदों में से 44 ने उन्हें पद से हटाने के पक्ष में वोट दिया, जबकि एक सांसद अनुपस्थित रहा. खास बात यह रही कि उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने भी उनके खिलाफ मतदान किया. इससे पहले पेना ने गुरुवार को पद छोड़ने की पेशकश की थी, लेकिन सांसदों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय महाभियोग के जरिए उन्हें कदाचार का दोषी ठहराने का फैसला किया.

30 लाख लोगों की बचत फंसी

यूएनो बैंक को देश के केंद्रीय बैंक ने अपने नियंत्रण में ले लिया था. इसके बाद करीब 30 लाख जमाकर्ता अपनी जमा पूंजी और पेंशन की रकम नहीं निकाल पा रहे हैं. बैंक के बंद होने से देश की आधी से अधिक आबादी प्रभावित हुई है. राजधानी असुनसियोन समेत कई जगहों पर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

आरोप है कि राष्ट्रपति पेना ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके सरकारी धन बैंक तक पहुंचाने में मदद की. वहीं, नियामक संस्थाओं ने बैंक की संदिग्ध ऋण प्रक्रियाओं और उसके मालिकों से जुड़ी कंपनियों के लेनदेन पर कार्रवाई नहीं की. महाभियोग की कार्यवाही में यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य के पेंशन फंड ने बैंक में करीब 355 मिलियन डॉलर जमा किए थे, जो निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक थे.

उपराष्ट्रपति ने संभाली राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी

पेना को हटाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति पेद्रो अलियाना ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. वह वर्ष 2028 तक इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे. शपथ लेने के बाद उन्होंने वित्तीय संकट से प्रभावित लोगों को उनकी रकम का पूरा मुआवजा देने का भरोसा दिया.

अब पूर्व राष्ट्रपति पर चल सकता है मुकदमा

बता दें कि पेना पर हितों के टकराव, सरकारी धन के गलत इस्तेमाल, नियामक संस्थाओं के कामकाज में दखल और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने जैसे आरोप लगाए गए हैं. अब उनसे विश्वासघात, प्रभाव के गलत इस्तेमाल और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में पूछताछ होनी है. हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उनके वकील रिकार्डो प्रेडा ने आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना और अवसरवादी बताया है.

गौरतलब है कि पिछले साल तक पेना उस कंपनी में हिस्सेदार थे, जिसके पास यूएनो बैंक का स्वामित्व था. बैंक के अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ विवाद अब देश की सत्ता में बड़े बदलाव की वजह बन गया है.

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