Uttar Pradesh

यूपी में बदली जर्जर जल संरचनाओं की तस्वीर, योगी सरकार ने रचा तकनीकी कीर्तिमान

UP Water Management : योगी सरकार प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दे रही है। साढ़े नौ वर्षों में प्रमुख बैराज, बांध और रेगुलेटरों के जर्जर गेट बदले गए हैं। लखनऊ के गोमती बैराज के सभी 10 गेट और पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के चारों गेटों का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है।

UP Water Management : योगी सरकार प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं बैराज, बांध, हेड रेगुलेटर और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के गेटों के निर्माण और प्रतिस्थापन पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ बाढ़ और आपदा की स्थिति में जल संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गोमती बैराज के सभी 10 गेट बदले गए

प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि योगी सरकार की पहल से पुरानी और जर्जर हो चुकी जल संरचनाओं को आधुनिक तकनीक से नया जीवन मिल रहा है। उन्हाेंने बताया कि लंबे समय से उपयोग में होने से कई महत्वपूर्ण बैराजों और बांधों के गेट समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गए थे। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है, ताकि जल संरचनाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए और सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में बड़े पैमाने पर गेटों के प्रतिस्थापन का काम किया गया है। पीलीभीत स्थित चुक्का हेड रेगुलेटर के सभी चार गेट बदले जा चुके हैं। बुलंदशहर स्थित नरौरा बैराज के कुल 61 गेटों में से 13 गेटों का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है, जबकि शेष 48 गेटों के निर्माण और प्रतिस्थापन का कार्य जारी है। लखनऊ स्थित गोमती बैराज के सभी 10 गेट बदले जा चुके हैं। वहीं, एटा स्थित तातारपुर एलजीसी एवं पीएलजीसी कनेक्टिंग रेगुलेटर तथा हेड रेगुलेटर के कुल 20 गेटों का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है।

पानी के भीतर गेट बदलना बड़ी तकनीकी उपलब्धि

प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने बताया कि दिल्ली स्थित ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले जा चुके हैं और आपात स्थिति के लिए तीन स्पेयर गेट भी तैयार रखे गए हैं। भीमगौड़ा बैराज, हरिद्वार के 22 में से आठ खराब गेट बदले गए हैं। इन गेटों का निर्माण विभाग की आईएसओ प्रमाणित कार्यशालाओं, बरेली और झांसी में किया गया है। रामपुर स्थित कैनरी बैराज के 15 में से नौ, गाजियाबाद स्थित हिंडन बैराज के सभी आठ और अन्य प्रमुख जल संरचनाओं में भी पुराने गेटों के प्रतिस्थापन का काम किया गया है।

गोताखोरों की मदद से सफलतापूर्वक बदला गया

कई बांधों और बैराजों में अतिरिक्त स्पेयर गेट भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।प्रदेश में पहली बार अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पानी के भीतर स्थित गेटों को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से सफलतापूर्वक बदला गया है। ललितपुर स्थित माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में लगभग 60 से 70 फीट की गहराई में स्थित अंडर-स्लूइस गेटों का पानी के भीतर प्रतिस्थापन किया गया।

सिंचाई जल की आपूर्ति न हो प्रभावित

इसी तरह कचनौदा बांध में करीब 60 फीट की गहराई पर दो अंडर-स्लूइस गेटों का प्रतिस्थापन पूरा किया गया है और एक स्पेयर गेट सुरक्षित रखा गया है। इसके साथ ही हमीरपुर के मौदहा, महोबा के लहचूरा, बिजनौर के खो बैराज, बहराइच के घाघरा बैराज और लखीमपुर खीरी के शारदा बैराज जैसी महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के लिए भी स्पेयर गेट तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि आकस्मिक स्थिति में किसानों को सिंचाई जल की आपूर्ति प्रभावित न हो।

आपदा की स्थिति के लिए पहले से तैयारी

मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि योगी सरकार का जोर केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयारी पर भी है। प्रमुख बैराजों के लिए स्पेयर गेट सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि किसी गेट में अचानक खराबी आने पर उसे बिना समय गंवाए बदला जा सके। इससे जन-धन की संभावित क्षति को रोकने और जल प्रबंधन व्यवस्था को लगातार बनाए रखने में मदद मिलेगी।

समयबद्ध तरीके से रिसाव रोकने पर जोर

चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में करीब 80 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों से रिसाव की समस्या सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। रिसाव के कारण सिंचाई योग्य पानी की लगातार बर्बादी हो रही थी और आसपास के किसानों में चिंता थी।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों को रिसाव को तत्काल रोकने और विशेषज्ञ गोताखोरों तथा आधुनिक तकनीक की मदद से पानी के भीतर स्थित रिसाव को स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए। साथ ही कार्य की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न करने और समयबद्ध तरीके से रिसाव पूरी तरह रोकने पर जोर दिया गया, ताकि खरीफ और आगामी फसलों के लिए नहरों में पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सके।

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