
Punjab Politic : आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने गुरुवार को भाजपा-अकाली सरकार पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके शासन के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी और बेअदबी की बार-बार घटनाएं हुईं। इसके बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोलीबारी की। उन्होंने कहा कि 2015 की घटनाएं पंजाबियों के दिलों में आज भी गहरा घाव हैं, क्योंकि सत्ता में रहते हुए अकाली दल बादल ने राजनीतिक हितों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब और पंथ का इस्तेमाल किया। अब उस काले अध्याय के बावजूद प्रस्तावित नए भाजपा-अकाली गठबंधन को बेअदबी और गोलीकांड के मामलों में राजनीतिक संरक्षण पाने तथा पंजाब में तीन कृषि कानूनों को वापस लाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
2015 की बेअदबी और गोलीकांड के जिम्मेदारों को सजा की मांग
आप विधायक ने कहा कि पंजाब की जनता 2015 की बेअदबी और गोलीकांड के लिए जिम्मेदार लोगों को कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने मांग की कि एसआईटी (विशेष जांच दल) यह पता लगाए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया था और कृष्ण भगवान सिंह तथा गुरजीत सिंह की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सवाल किया कि तत्कालीन गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी से अनजान होने का दावा कैसे कर सकते हैं, जबकि इसकी जानकारी उनके अपने कार्यालय तक पहुंची थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सुखबीर सिंह बादल पांच सितारा होटल में बैठे थे और वहां से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे थे।
गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी की जानकारी से अनजान रहने पर सवाल
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने कहा, “1 जून 2015 को अकाली-भाजपा सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी चोरी हो गए थे, लेकिन सरकार ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। उस समय गृह मंत्री रहे सुखबीर सिंह बादल ने एसआईटी से पूछताछ के दौरान कहा है कि उन्हें चोरी की जानकारी नहीं थी। हालांकि, इंटेलिजेंस विंग ने एक रिपोर्ट भेजी थी और सुखबीर सिंह बादल के निजी सचिव ने भी एसआईटी को बताया था कि घटना की जानकारी उपलब्ध थी। जब उनके अपने कार्यालय को जानकारी मिल चुकी थी तो गृह मंत्री इससे अनजान कैसे रह सकते हैं?”
समय पर कार्रवाई न होने से बढ़ी बेअदबी की घटना
आप विधायक ने कहा कि चोरी के बाद भी सरकार ने उस समय कार्रवाई नहीं की, जब सितंबर 2015 में पोस्टर लगाए गए और सिखों को चोरी हुए गुरु साहिब को खोजने की चुनौती दी गई। उन्होंने कहा, “समय पर कार्रवाई करने में सरकार की विफलता ने अक्टूबर में बेअदवी की अगली घटना को अंजाम देने वालों का हौसला बढ़ाया, जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग सड़कों पर बिखरे हुए पाए गए। इस घटना से दुनियाभर के सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची।”
कोटकपूरा में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार का आरोप
विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने कहा कि कोटकपूरा में संगत शांतिपूर्वक एकत्र हुई थी और वहां अरदास तथा कीर्तन हो रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें की गईं। विधायक ने कहा कि वह भी उस प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें सुखबीर बादल, चरनजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ कार्यवाही चल रही है और वे फिलहाल जमानत पर हैं। एसआईटी के सामने मुख्य सवाल यह है कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हटाने के निर्देश किसने दिए।”
बहबल कलां गोलीकांड में दो युवकों की मौत का मामला
आप विधायक ने कहा कि इसके बाद 14 अक्टूबर को बहबल कलां में हुई घटनाएं और भी ज्यादा पीड़ादायक थीं, जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही संगत पर पुलिस की गोलीबारी में दो युवकों, कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई। उन्होंने कहा, “सुखबीर बादल बार-बार दावा करते रहे हैं कि वह उस समय पंजाब में नहीं थे। लेकिन उनकी जमानत से संबंधित अदालती दस्तावेज बताते हैं कि सुखबीर बादल पंजाब में मौजूद थे और एक पांच सितारा होटल में ठहरे हुए थे। वहां से चरनजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे थे। पंजाब की जनता जानना चाहती है कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और प्रदर्शनकारियों को हटाने के निर्देश किसने दिए। सुखबीर बादल ने खुद श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष इन घटनाओं में अपनी भूमिका स्वीकार की थी।”
श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष स्वीकारोक्ति का रिकॉर्ड में होने का दावा
ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा एसआईटी को दिए गए बयान का जिक्र करते हुए विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा की गई स्वीकारोक्ति की सामग्री रिकॉर्ड का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “यदि यह स्वीकारोक्ति और अन्य सबूत पहले से रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें अदालत और एसआईटी के सामने क्यों नहीं रखा जाना चाहिए? जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा क्यों नहीं मिलनी चाहिए? पंजाब को यह जानने का अधिकार है कि आदेश किसने दिए और कृष्ण भगवान सिंह तथा गुरजीत सिंह की मौत के लिए कौन जिम्मेदार था।”
भाजपा-अकाली समझौते पर अतीत से सबक नहीं सीखने का आरोप
आप विधायक ने यह भी कहा कि अकाली दल और भाजपा के बीच प्रस्तावित नए समझौते से स्पष्ट है कि दोनों दलों ने अतीत से कोई सबक नहीं सीखा है। उन्होंने कहा, “गठबंधन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि भाजपा एक बार फिर केंद्र में सत्ता में है और सुखबीर बादल बेअदबी तथा कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत से जुड़े मामलों में राजनीतिक संरक्षण की उम्मीद कर रहे हैं। प्रस्तावित अकाली-भाजपा गठबंधन पंजाब या पंथ के हितों के लिए नहीं है। इसे इसलिए आगे बढ़ाया जा रहा है क्योंकि भाजपा एक बार फिर केंद्र में सत्ता में है और सुखबीर बादल इन मामलों में राजनीतिक संरक्षण की उम्मीद कर रहे हैं। सुखबीर बादल एक बार फिर राजनीतिक लाभ के लिए पंजाब और पंथ के हितों से समझौता कर रहे हैं।”
तीन कृषि कानूनों को वापस लाने के प्रयास से गठबंधन को जोड़ने का दावा
विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने आगे कहा कि प्रस्तावित समझौता पंजाब में तीन कृषि कानूनों को वापस लाने के प्रयासों से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा, “कृषि कानूनों के कारण किसानों के आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की मौत हुई थी और सुखबीर सिंह बादल एक बार फिर राजनीतिक लाभ के लिए पंजाब के हितों से समझौता कर रहे हैं।”
एसआईटी की कार्यवाही पर पंजाब की जनता की नजर
आप विधायक ने कहा कि पंजाब की जनता एसआईटी की कार्यवाही पर करीबी नजर रख रही है और बेअदबी तथा दोनों युवा प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को नहीं भूलेगी। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई और जो गोलीबारी के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें अंततः न्याय का सामना करना पड़ेगा। न्याय का पहिया भले ही धीरे चलता है, लेकिन वह बेहद बारीकी से न्याय करता है।”
बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून का दावा
उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार ने बेअदवी के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं और इसके तहत कड़े कानून का प्रावधान किया गया है, जिसमें जमानत उपलब्ध नहीं होगी और उम्रकैद की सजा दी जा सकेगी। उन्होंने कहा, “जिन लोगों को इस कानून का डर है, वे इसके खिलाफ आपत्तियां और बाधाएं पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, पंजाब के अधिकारों के लिए लड़ने वाले वरिष्ठ वकीलों और बुद्धिजीवियों ने इस कानून का समर्थन किया है और इसे उचित माना है। भगवंत मान सरकार बेअदवी के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है,” विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा ने कहा।
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