
New Delhi : गणतंत्र दिवस 2026 (Republic Day 2026) के पावन अवसर पर भारत ने एक बार फिर अपने वीर और असाधारण साहसियों को सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को शांति काल के सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया।
समारोह के दौरान जब शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान किया गया, तो उनकी पत्नी कामना शुक्ला की मुस्कान और आंखों में खुशी के आंसू इस सम्मान की महत्ता को और बढ़ा रहे थे। इस पल ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया।
अंतरिक्ष में साहस और पराक्रम
शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान पायलट के रूप में की। उनके पास सुखोई-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर और एएन-32 जैसे कई विमानों को लगभग दो हजार घंटे तक उड़ाने का अनुभव है।
पिछले साल जून में, शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे। इस मिशन के दौरान उनके साहस और उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। इसी असाधारण साहस के लिए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
गौरव का पल और प्रेरणा
अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन करने वाले शुभांशु शुक्ला का यह सम्मान देशवासियों के लिए गर्व का पल है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में कहा कि ऐसे वीर नागरिक हमें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी साहस और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देते हैं।
शुभांशु शुक्ला का यह पराक्रम न केवल भारतीय वायुसेना और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक मिसाल है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। उनके इस साहस और समर्पण ने साबित कर दिया कि कठिन से कठिन मिशन भी दृढ़ निश्चय और साहस के साथ सफल हो सकते हैं।
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