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भारत के पड़ोस पर ट्रंप की नजर!, ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए इस समझौते पर तिलमिलाया अमेरिका

International News : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में अपनी दबदबा बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। हाल ही ट्रंप ने को अमेरिकी क्षेत्र बताते हुए वेनेजुएला पर हमला किया था। पूर्वी यूरोप में रूस पर अपना कंट्रोल पाने के लिए ग्रीन लैंड पर भी बलपूर्वक कब्जा जमाना चाहते हैं। इनसब के बीच उनका एक बयान सामने आया है, जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि ट्रंप की नजर भारत के पड़ोस पर भी है।

दरअसल, पूरी दुनिया में अमेरिका का बोलबाला बढ़ाने के नाम पर ट्रंप हर तरह के समझौते और संधि को बकवास बता रहे हैं। इस बार उनका निशाना रहा ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुआ चोगास द्वीप समूह का संप्रभुता समझौता। ट्रंप ने इस समझौते को ‘पूर्ण कमजोरी’ और ‘बड़ी मूर्खता’ करार दिया और इसे अपनी ग्रीनलैंड की मांग से जोड़ते हुए कहा कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

ट्रंप का कड़ा रुख

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर ब्रिटेन की इस योजना पर हमला करते हुए इसे कमजोर और मूर्खतापूर्ण बताया। उनका कहना था कि डिएगो गार्सिया द्वीप, जो एक अहम अमेरिकी सैन्य अड्डा है, को बिना किसी ठोस कारण के मॉरीशस को सौंपना न केवल अमेरिका की ताकत को कमजोर करेगा, बल्कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गलत संदेश भेजेगा।

उन्होंने इसे ग्रीनलैंड हासिल करने की अपनी मांग का एक और कारण बताया और कहा कि डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को इस मुद्दे पर सही कदम उठाना चाहिए। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि चीन और रूस ने इस कमजोरी को पहले ही नोटिस कर लिया है। उनका कहना था कि उनकी अगुवाई में अमेरिका पहले से कहीं अधिक सम्मानित है और इस तरह के कदम से यह सम्मान कम हो सकता है।

भारत की भूमिका

हालांकि, ट्रंप ने भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन भारत के इस मुद्दे पर समर्थन की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता। भारत ने हमेशा से मॉरीशस के डिकोलोनाइजेशन (उपनिवेशीकरण समाप्त करने) के प्रयासों का समर्थन किया है और अब वह इस द्वीप समूह की मरीन प्रोटेक्टेड एरिया को विकसित करने के लिए 68 करोड़ डॉलर की सहायता दे रहा है। इसके अलावा, भारत ने सैटेलाइट स्टेशन स्थापित करने और हाइड्रोग्राफिक सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी मदद की है।

भारत हिंद महासागर को अपनी प्रभाव क्षेत्र मानता है और इसे मिलिटराइज होने से रोकने के लिए हमेशा सक्रिय रहा है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ। इसी बीच, ट्रंप का यह बयान इस क्षेत्र में भारत की रणनीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह अमेरिका के साथ भारत के रक्षा संबंधों को भी चुनौती दे सकता है।

दीएगो गार्सिया का महत्व

डिएगो गार्सिया, चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो 1960 के दशक से ब्रिटेन और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी ऑपरेशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 1965 में ब्रिटेन ने चागोस को ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (बीआईओटी) बना दिया और मॉरीशस से अलग कर दिया, जिसके बाद हजारों मूल निवासियों को जबरन हटा दिया गया था।

हालांकि, मई 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी गई, लेकिन डिएगो गार्सिया पर ब्रिटेन को 99 साल का लीज़ मिलेगा, जिससे अमेरिका का सैन्य अड्डा सुरक्षित रहेगा। इस समझौते को लेकर ट्रंप प्रशासन ने समर्थन दिया था, लेकिन अब ट्रंप ने इस पर सवाल उठाया है और इसे अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया है।

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