Uttar Pradesh

डिस्लेक्सिया और ADHD से प्रभावित बच्चों के लिए योगी सरकार की पहल, 100 शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण

UP News : योगी सरकार प्रदेश में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरतों के अनुसार शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है. इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से 22 और 23 अक्टूबर को दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य डिस्लेक्सिया और अटेंशन डेफिसिट एंड हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से प्रभावित बच्चों की पहचान, आकलन और प्रभावी शिक्षण तकनीकों के माध्यम से उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना था. कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए विशेष शिक्षकों के साथ प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा से जुड़े करीब 100 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया.

प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को डिस्लेक्सिया और अन्य विशिष्ट अधिगम दिव्यांगताओं के प्रति जागरूक करना तथा बच्चों में इनकी समय पर पहचान और प्रभावी शिक्षण तकनीकों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना था. उपनिदेशक एवं कोर्स को-ऑर्डिनेटर डॉ. अमित कुमार राय ने प्रशिक्षण की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डाला. विशेषज्ञों ने दिव्यांगताओं की पहचान, प्रमाण-पत्र प्रक्रिया, आकलन उपकरणों, बहुसंवेदी शिक्षण पद्धतियों, कक्षा प्रबंधन और बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास से संबंधित जानकारी दी.

अभिभावकों और विशेषज्ञों के समन्वय पर जोर

कार्यक्रम में शिक्षकों, अभिभावकों और विशेषज्ञों के आपसी समन्वय से बच्चों के लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया. स्कूल एजुकेशन चेंजिंग फाउंडेशन, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी, अध्यापक प्रशिक्षण केंद्र, समृद्धि एवं लर्निंग फाउंडेशन और बचपन डे केयर सेंटर के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया. विशेषज्ञों ने बताया कि डिस्लेक्सिया में पढ़ने और शब्दों की पहचान करने, डिस्ग्राफिया में लिखने तथा डिस्कैल्कुलिया में गणितीय अवधारणाओं को समझने में कठिनाई हो सकती है.

सीखने में कठिनाई बुद्धि की कमी नहीं

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सीखने में कठिनाई को बुद्धि की कमी नहीं माना जाना चाहिए. बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण व्यवस्था विकसित करना जरूरी है. कठिनाइयों की समय पर पहचान, विशेषज्ञों से परामर्श, अनुकूल शिक्षण पद्धतियों और अभिभावकों के साथ समन्वय के माध्यम से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है.

कार्यक्रम में बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और उनकी क्षमताओं तथा सीखने की गति के अनुसार शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया. विशेष शिक्षकों और प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सहभागिता से विशिष्ट अधिगम दिव्यांगताओं के प्रति समझ विकसित करने तथा विद्यालयों में सहयोगात्मक और बाल-अनुकूल वातावरण तैयार करने को महत्वपूर्ण बताया गया.

आगे भी आयोजित होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम

समापन सत्र में प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया और प्रमाण-पत्र वितरित किए गए. दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की यह पहल विशिष्ट अधिगम दिव्यांगताओं से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है. विभाग की ओर से 30 और 31 अक्टूबर तथा 2 और 3 नवंबर को डिस्लेक्सिया पर दोबारा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इनका उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना और दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराकर उनके आत्मविश्वास और शैक्षिक विकास को प्रोत्साहित करना है.

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