Punjab

Vigilance Bureau का बड़ा एक्शन, 2025 में 187 रिश्वतखोरों को रंगे हाथ पकड़ा

Vigilance Bureau Punjab : समाज से भ्रष्टाचार के समूल नाश के लिए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (VB) ने इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने का संकल्प लेते हुए रिश्वतखोरों पर नकेल कसने और जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाई है। इस दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने विभिन्न मामलों में 187 व्यक्तियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, जो पंजाब सरकार के कुशल और जवाबदेह शासन को दर्शाता है।

रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों किया काबू

जानकारी देते हुए विजिलेंस ब्यूरो के सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने 127 ट्रैप मामलों में विभिन्न विभागों के 144 सरकारी कर्मचारियों और 43 निजी व्यक्तियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक 18 गजटेड अधिकारियों और 126 नॉन-गजटेड कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।

अलग-अलग मामलों में रिश्वत लेते किया काबू

उन्होंने खुलासा किया कि वर्ष 2025 के दौरान अन्य विभागों के अलावा पंजाब पुलिस के 43, राजस्व विभाग के 20, बिजली विभाग के 21, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 14, परिवहन विभाग के 9, स्थानीय निकाय विभाग के 8, वन विभाग के 5, स्वास्थ्य विभाग के 5 और मंडी बोर्ड के 3 कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके अतिरिक्त शिक्षा, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा कार्मिक विभाग के भी दो-दो कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में काबू किया गया।

गजटेड और नॉन-गजटेड कर्मचारी शामिल

ब्यूरो की कार्यप्रणाली के बारे में और जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपियों के खिलाफ 113 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 17 गजटेड अधिकारी, 98 नॉन-गजटेड कर्मचारी और 118 निजी व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा 17 गजटेड अधिकारियों, 20 नॉन-गजटेड कर्मचारियों और 15 निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए 38 विजिलेंस जांचें (इन्क्वायरी) भी दर्ज की गई हैं। साथ ही 4 गजटेड अधिकारियों, 5 नॉन-गजटेड कर्मचारियों और 2 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के 10 मामले भी दर्ज किए गए हैं।

विभागों से किया गया बर्खास्त

इसके अतिरिक्त विजिलेंस ब्यूरो के मामलों की सुनवाई के दौरान अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने पर 6 नॉन-गजटेड कर्मचारियों को उनके संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा सेवा से बर्खास्त भी किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2025 के दौरान 65 विजिलेंस जांचों का सफलतापूर्वक निपटारा भी किया है।

पांच वर्ष तक कैद की सजा

अन्य विवरण साझा करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न अदालतों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ब्यूरो द्वारा दर्ज और लड़े गए 34 मामलों में 63 आरोपियों को सजा सुनाई है, जिनमें 3 गजटेड अधिकारी, 38 नॉन-गजटेड कर्मचारी और 22 निजी व्यक्ति शामिल हैं। इन आरोपियों को एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक की कैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालतों ने इन मामलों में 5,000 रुपये से लेकर 2,01,000 रुपये तक के जुर्माने भी लगाए हैं, जो कुल मिलाकर 18,71,000 रुपये बनते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सेमिनार और जनसभाएं आयोजित

विजिलेंस ब्यूरो ने विजिलेंस जागरूकता सप्ताह के दौरान जागरूकता अभियानों को प्रभावी ढंग से लागू किया। इसके तहत भ्रष्टाचार के उन्मूलन के उद्देश्य से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सेमिनार और जनसभाएं आयोजित की गईं तथा ब्यूरो के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ईमानदारी की शपथ भी दिलाई गई। वर्ष 2025 के दौरान विजिलेंस ब्यूरो को कुल 6158 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 363 शिकायतें भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुईं।

उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2025 के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में कई प्रभावशाली व्यक्तियों को भी नामजद/गिरफ्तार किया गया, जिनमें पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, विधायक रमन अरोड़ा, आईपीएस अधिकारी हरचरण सिंह भुल्लर, जालंधर से सहायक आयुक्त सीजीएसटी रविंदर कुमार शर्मा, बटाला से पीसीएस अधिकारी विक्रमजीत सिंह पांथे, लुधियाना से पीसीएस अधिकारी गुरबीर सिंह कोहली, एसबीएस नगर से पीसीएस अधिकारी रविंदर कुमार बंसल, पनसप के जनरल मैनेजर अजीतपाल सिंह सैनी, पीएसपीसीएल के डिप्टी चीफ इंजीनियर हरमिंदर सिंह, सब-रजिस्ट्रार जगतार सिंह, तहसीलदार राम लाल, एसएमओ डॉ. सुमित सिंह, डीएसपी गुरशेर सिंह तथा सिविल अस्पताल सुनाम से डॉ. अमित सिंगला शामिल हैं।

इनके खिलाफ किया गया मामला दर्ज

इसके अलावा वर्ष 2025 के दौरान क्रमशः फाजिल्का, एसएएस नगर, अमृतसर और कपूरथला में तैनात परमजीत सिंह, धनवंत सिंह, कुलवंत सिंह, लखबीर सिंह और हरदयाल सिंह (सभी बीडीपीओ), अमरजीत सिंह (वन रेंज अधिकारी, होशियारपुर), नरिंदरपाल सिंह (कार्यकारी अभियंता) तथा नगर निगम जालंधर, एमसी पटियाला, एमसी बठिंडा, एमसी फगवाड़ा और एमसी गुरदासपुर में तैनात सहायक टाउन प्लानर सुखदेव विशिष्ट, एटीपी जसपाल सिंह, एटीपी गुरप्रीत सिंह, एटीपी राज कुमार और एटीपी चरनजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया या उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

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