US Iran Conflict : अमेरिका-ईरान में चल रही बातचीत के बीच अचानक इजरायल-अमेरिका ने एक साथ ईरान पर हमला कर दिया। हमले पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान दिया था कि ईरान से खतरा है इसीलिए हमला करना पड़ा। जवाब में ईरान ने भी सऊदी-अरब, कतर, UAE सहित 8 पड़ोसी देशों पर एक साथ मिसाइल से हमला किया।
हाल ही में प्रकाशित वाशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया कि इस हमले के लिए इजरायल-सऊदी अरब ने लागातार लॉबिंग की थी। मीडिया रिपोर्ट ने बताया था कि अमेरिका को ईरान से कोई खतरा नहीं था, बल्कि हमले के पीछे ट्रंप के एक ‘मुस्लिम दोस्त’ का हाथ था।
कई हफ्तों तक चली लॉबिंग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने से लगातार सऊदी अरब से अमेरिकी राष्ट्रपति की प्राइवेट कॉल पर बात हुई थी। इस दौरान ट्रंप को हमले के लिए उकसाया गया था। इजरायल और सऊदी अरब ने कई हफ्तों तक इस हमले के लिए लॉबिंग की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्रउन प्रिंस भले ही अमेरिका से हमले का दबाव बना रहे थे, लेकिन सार्वजनिक मंच पर कूटनीतिक अप्रोच करते दिखे। सऊदी प्रिंस ने आग्रह किया था कि यह हमले का सही समय है। इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बातचीत को गुप्त रखा गया था। हालांकि इस रिपोर्ट के आने के बाद मुस्लिम देशों में सऊदी-अरब को लेकर नाराजगी बढ़ सकती है।
खामेनेई युग का अंत
अमेरिका-इजरायल हमले से ईरान में 47 साल के खामेनेई शासनकाल का अन्त हो गया। तेहरान के सरकारी मीडिया पर खबर बताते हुए एंकर रोने लगे। ईरान एकमात्र शिया बहुल देश है। खामनेई के मारे जाने की खब़र से पाकिस्तान, भारत समेत कई देशों में शिया समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ आगजनी की। इस दौरान लगभग 35 प्रदर्शकारियों की मौत हो गई।
वर्चस्व की लड़ाई
मुस्लिम देशों में हमेशा से वर्चस्व की लड़ाई चलती रही है। सुन्नी देशों का प्रतिनिधित्व सऊदी-अरब और शिया देशों का प्रतिनिधित्व ईरान करता रहा है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो ट्रंप इस हमले के लिए तैयार नहीं थे। सऊदी-इजरायल के दबाव में उन्होने हमले का आदेश दिया। सऊदी-इजरायल ने लॉबिंग करते हुए कहा था कि तेहरान के दबदबे को कम करने का ये सही समय है।
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