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UGC के नए नियमों पर सवर्णों का विरोध, कुमार विश्वास ने कविता के जरिए जताया गुस्सा

UGC Controversy : यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद शरु हो गया है। सवर्ण अब खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं। इस पर सरकार भी एक्शन में आ गई है और बीच का रास्ता निकालने के लिए मंथन शुरू किया है। इन सबके बीच कवि डॉ. कुमार विश्वास ने एक कविता के रूप में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने मंगलवार को एक्स पर स्व० रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट कर यूजीसी एक्ट के विरोध में दर्द बयां किया है।

उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा कि, 

“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,

राई लो या पहाड़ लो राजा,

मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,

रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…।”

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया त्यागपत्र

दरअसल ये विवाद तब तूल पकड़ा जब यूजीसी के नए नियमों के विरोध में बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। आज वह बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठ गए हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश के बाद यूजीसी ने नियमों में बदलाव किया है।

नियमों में किए गए इन बदलावों के कारण बढ़ा विवाद

भेदभाव के दायरे को सख्त और विस्तृत करना

दरअसल, 2026 के नियमों में भेदभाव की परिभाषा को ज्यादा सख्त और विस्तृत किया गया है, जो 2012 के नियमों की तुलना में अधिक व्यापक है। इसके साथ ही जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें अब एससी, एसटी के अलावा ओबीसी के छात्रों और कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।

झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटाना

बता दें कि साल 2012 के नियमों में झूठी शिकायतों पर जुर्माने और दंड के प्रावधान थे, लेकिन 2026 के नियमों में इसे हटा दिया गया है ताकि असली पीड़ित शिकायत करने से न डरें। इसका विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जिनके पक्ष में ये नियम लगाए गए हैं वो इसका गलत इस्तेमाल कर सवर्णों को फंसा सकते हैं।

सख्त निगरानी तंत्र व संस्थानों पर जिम्मेदारी

इसके अलावा नए नियम में ये भी कहा गया है कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को समता दस्ते और समता दूत की नियुक्ति करनी होगी। साथ ही भेदभाव के मामलों पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी। दंड विधि के तहत मामला बनता है तो पुलिस को तत्काल सूचित किया जाएगा। साथ ही यदि संस्थान नियमों का पालन नहीं करते हैं तो यूजीसी दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है, जैसे डिग्री, वित्तीय मदद या ऑनलाइन कोर्सों पर रोक लगाना।

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