Punjab News : पंजाब में धान खरीद का सीजन शुरू होने के साथ ही मंडियों में व्यवस्थाओं का जायजा लेने का सिलसिला जारी है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने तरनतारन दाना मंडी पहुंचकर खरीद व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों की मेहनत से पैदा हुई फसल का एक-एक दाना खरीदेगी.
राज्य में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है. मंत्री ने कहा कि किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी.
खरीद, लिफ्टिंग और भुगतान की ली जानकारी निरीक्षण के दौरान मंत्री ने गांव करमूवाला के किसान सुलखण सिंह और गांव सखीरा के किसान शमशेर सिंह की फसल की खरीद भी करवाई, उन्होंने मंडी में धान की खरीद, लिफ्टिंग, भुगतान और बारदाने समेत तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाए. इस दौरान उन्होंने किसानों, आढ़तियों और मजदूरों से भी बातचीत की.
180 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
पत्रकारों से बातचीत में लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि इस साल मंडियों में धान की अच्छी फसल पहुंच रही है और इसकी गुणवत्ता भी बेहतर है. केंद्रीय पूल के लिए इस सीजन में 180 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
उन्होंने बताया कि किसानों को फसल का भुगतान पारदर्शी तरीके से सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है. धान खरीद के लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 42,786 करोड़ रुपये की नकद ऋण सीमा यानी सीसीएल की मंजूरी मिल चुकी है.
MSP पर मंत्री ने किसानों से की अपील
मंत्री ने किसानों से अपील की कि फसल पूरी तरह पकने और सूखने के बाद ही कटाई करें, उन्होंने कहा कि मंडियों में निर्धारित मानकों के मुताबिक सूखा धान लाने पर किसानों को 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और उन्हें अनावश्यक इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा.
पराली जलाने के सवाल पर मंत्री ने किसानों से इसे न जलाने की अपील की, उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती और पर्यावरण की रक्षा करना सभी की साझा जिम्मेदारी है, उन्होंने बताया कि पराली के उचित प्रबंधन के लिए सरकार ने प्रबंध किए हैं, उन्होंने कहा कि खरीद सीजन को सुचारू और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए किसानों, आढ़तियों, मिलरों, मजदूरों, खरीद एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है.
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