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भोपाल में कृषि समागम: नई फसलों और आधुनिक तकनीक पर जोर, किसानों को दिखाए गए कमाई के नए रास्ते

Bhopal Agriculture Event : राजधानी भोपाल में आयोजित कृषि वर्ष-2026 के वैचारिक समागम में खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई संभावनाओं पर चर्चा की गई। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में लगे स्टॉलों पर ब्लूबेरी, राइस बेरी, स्ट्रॉबेरी और विदेशी सब्जियों जैसी वैकल्पिक फसलों ने किसानों का खास ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फसलों से कम जमीन में भी बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे, जहां आधुनिक खेती, उन्नत तकनीक और नई फसल पद्धतियों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

ब्लूबेरी और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों से बेहतर मुनाफे की उम्मीद

धार जिले के किसान लखन पाटीदार ने अपने स्टॉल पर ब्लूबेरी, राइस बेरी और स्ट्रॉबेरी की खेती का मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत में इन फसलों का उत्पादन अभी सीमित है, जबकि बाजार में इनकी मांग अधिक है और अधिकांश उत्पाद विदेशों से आयात होते हैं।

उनके अनुसार, एक पौधे पर करीब 700 से 800 रुपये की लागत आती है, लेकिन यह लंबे समय तक उत्पादन देता है। एक पौधा लगभग 10 वर्षों तक फल दे सकता है, जिससे किसानों को स्थिर और अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

विदेशी सब्जियों की खेती भी बन रही आमदनी का जरिया

भोपाल के लंबाखेड़ा के किसान किशन मौर्य ने अपने स्टॉल पर सेलरी, विदेशी धनिया और बेबी कॉर्न जैसी सब्जियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इन फसलों की बाजार में कीमत पारंपरिक सब्जियों की तुलना में अधिक होती है।

जहां सामान्य सब्जियां 10 रुपये प्रति किलो के आसपास बिकती हैं, वहीं ये विदेशी सब्जियां 25 से 50 रुपये प्रति किलो तक आसानी से बिक जाती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 20 से 25 किसानों को इस खेती से जोड़ा जा चुका है और उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके लिए पॉलीहाउस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जहां किसान पौधे और प्रशिक्षण दोनों प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार का फोकस: आधुनिक खेती और किसान कल्याण

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी उद्देश्य से यह वैचारिक समागम आयोजित किया गया है, जहां विशेषज्ञ किसानों को नई तकनीकों और फसलों की जानकारी दे रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि गुना जिले में गुलाब की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है और आने वाले समय में इसे “गुलाबों की नगरी” के रूप में पहचान मिल सकती है।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समर्थन मूल्य, सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि इस समागम में किसानों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं, जिनके आधार पर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके और किसानों की आय में वृद्धि हो।

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