Europe Protests : यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई और आवास की समस्या अब लोगों के गुस्से की वजह बन रही है. घरों की आसमान छूती कीमतें, महंगे किराये और आमदनी के मुकाबले तेजी से बढ़ते खर्च ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है. इसी के विरोध में फ्रांस, इटली, बेल्जियम और पुर्तगाल में लोगों ने प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकारें महंगाई पर नियंत्रण करने के साथ किफायती आवास और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएं.
यूरोपीय संघ के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में घरों की कीमतों में सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि किराये 3 प्रतिशत बढ़े. वर्ष 2015 के बाद से यूरोपीय संघ में घरों की कीमतों में औसतन करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
पुर्तगाल में घर खरीदना हुआ मुश्किल
वहीं, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन समेत बड़े शहरों में आवास संकट गंभीर होता जा रहा है. 17 अक्टूबर को हजारों लोग महंगे घरों, बढ़ते किराये और कम वेतन के विरोध में सड़कों पर उतरे. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आवास की कमी के खिलाफ सार्वजनिक स्थानों पर टेंट लगाकर विरोध जताया. रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के बाद से देश में घरों की कीमतें दोगुने से ज्यादा हो चुकी हैं. इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं और कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है.
फ्रांस में बजट कटौती के खिलाफ प्रदर्शन
फ्रांस में 17 अक्टूबर को महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और प्रस्तावित सरकारी बजट कटौती के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए. रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में करीब 5.5 लाख लोगों ने विरोध जताया. कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं.
इटली के मिलान, बोलोनिया और ट्यूरिन समेत कई शहरों में लोगों ने बढ़ते घरेलू खर्च और बिलों के खिलाफ आवाज उठाई. बेल्जियम में भी जीवनयापन की लागत को लेकर नाराजगी सामने आई.
महंगे आवास का असर केवल घर खरीदने वालों तक सीमित नहीं है. किरायेदारों, नौकरी के लिए दूसरे शहर जाने वाले युवाओं और बच्चों वाले परिवारों के लिए भी भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में किफायती आवास यूरोप के सामने बड़ी चुनौती बन गया है.
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