Uttar Pradesh

गंगा किनारे 22 आर्द्रभूमियां अधिसूचित, 8 की एकीकृत प्रबंधन योजनाएं तैयार

UP News : उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण को अब सिर्फ पर्यावरण बचाने की पहल तक सीमित नहीं रखा जा रहा है. योगी सरकार इसे गंगा पुनर्जीवन, जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी से जोड़कर आगे बढ़ा रही है. इसी दिशा में गंगा नदी के किनारे मौजूद 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को विधिवत अधिसूचित किया जा चुका है. इन क्षेत्रों के वैज्ञानिक और समन्वित प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाओं पर काम चल रहा है.

प्रदेश की 8 आर्द्रभूमियों के लिए एकीकृत प्रबंधन योजना यानी आईएमपी के प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं. इनकी समीक्षा की जा रही है. समीक्षा पूरी होने के बाद प्रस्तावों को अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के सामने रखा जाएगा. योजनाओं में प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है.

तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाएं

फिलहाल मुजफ्फरनगर, प्रयागराज और बलिया में आर्द्रभूमि संरक्षण और विकास की परियोजनाएं चल रही हैं. इन तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5.36 करोड़ रुपये है और इन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से वित्तीय सहायता मिल रही है.

प्रयागराज की 591.78 हेक्टेयर क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि में जल गुणवत्ता सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण पर काम हो रहा है. बलिया की 34.70 हेक्टेयर दहताल रेवती में जल संचयन, तटवर्ती पौधरोपण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं. वहीं मुजफ्फरनगर की 88.36 हेक्टेयर कालेवाला झील में प्रदूषण नियंत्रण, तटवर्ती क्षेत्र संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के उपाय किए जा रहे हैं.

275 आर्द्रभूमियों का सर्वे पूरा

गंगा तटवर्ती 27 जिलों में नदी से 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर मौजूद 275 आर्द्रभूमियों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण और हेल्थ कार्ड तैयार करने का काम पूरा हो चुका है. इनमें 231 आर्द्रभूमियां गंगा के अलग-अलग नदी-खंडों में शामिल हैं. बिजनौर से रामगंगा संगम तक 93, रामगंगा संगम से गोमती संगम तक 106 और गोमती संगम से घाघरा संगम तक 32 आर्द्रभूमियां दर्ज हैं.

जल सुरक्षा और भूजल संरक्षण पर जोर

आर्द्रभूमियां पानी को रोकने, प्रदूषकों को छानने और भूजल पुनर्भरण में प्राकृतिक रूप से मदद करती हैं. इनके संरक्षण से जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलता है. इसी वजह से इन्हें गंगा पुनर्जीवन की व्यापक योजना का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है.

22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां

प्रदेश की 22 उच्च प्राथमिकता वाली अधिसूचित आर्द्रभूमियां 10 जिलों में फैली हैं. इनका कुल क्षेत्रफल करीब 409.63 हेक्टेयर है. इनमें अलीगढ़, कासगंज, बदायूं, उन्नाव, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, चंदौली, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और भदोही की विभिन्न आर्द्रभूमियां शामिल हैं. इनके वैज्ञानिक आकलन और संरक्षण के जरिए गंगा पुनर्जीवन के साथ जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है.

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