UP News : उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पत्नी, दो पुजारियों और अपने ही बेटे की हत्या करने वाले आरोपी अरविंद सिंह का अंत हो गया. करीब 8 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पुलिस ने आरोपी को एनकाउंटर में मार गिराया. इस पूरे ऑपरेशन का सबसे बड़ा मकसद घर में बंधक बनाए गए बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था.
वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस लगातार करीब 7 घंटे तक आरोपी अरविंद सिंह से बातचीत कर उसे बच्चों को छोड़ने के लिए समझाती रही. आरोपी बार-बार सुबह तक इंतजार करने की बात कहता रहा, लेकिन बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ.
पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद जब आरोपी नहीं माना, तभी अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आई. आरोपी ने अपने 10 साल के बेटे को गोली मार दी थी.
गोली की आवाज सुनते ही पुलिस ने की फोर्स एंट्री
बच्चे को गोली लगने के बाद पुलिस ने बिना कोई जोखिम लिए तुरंत कार्रवाई शुरू की. टीम ने स्टेन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल कर घर में प्रवेश किया. पुलिस को अंदर आता देख आरोपी अरविंद सिंह ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.
आरोपी ने पुलिस पर करीब 6 राउंड गोलियां चलाईं. जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से अरविंद सिंह घायल हो गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.
पहले पत्नी, पुजारियों और बेटे की हत्या
पुलिस के मुताबिक, अरविंद सिंह ने पहले अपनी पत्नी, घर आए दो पुजारियों और फिर अपने मासूम बेटे की हत्या कर दी थी. इसके बाद उसने तीन बच्चों को बंधक बना लिया था. आरोपी ने सबसे छोटे बेटे को अपने कब्जे में रखा था. बच्चा हाथ से छूटने के बाद घायल हो गया, जिसके बाद आरोपी ने अपनी बेटी को गनपॉइंट पर ले लिया.
एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस की सूझबूझ और बेहतर ट्रेनिंग के चलते तीनों बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया. घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जबकि लंबे समय तक बंधक रहने के कारण बाकी दोनों बच्चे भूख-प्यास, डिहाइड्रेशन और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे.
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