Political News : स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए गए बयान ने सियासी बहस को तेज कर दिया है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि आरक्षण उत्थान के लिए है और यह स्थायी व्यवस्था नहीं है, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए. भागवत ने कोटे के राजनीतिकरण को भी जानबूझकर किया गया बताया.
भागवत के बयान पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने तीखी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और सरकार से जुड़े मुद्दों पर RSS की ओर से सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन पिछड़ों और दलितों के आरक्षण पर सलाह जरूर दी जाती है.
एक ही जाति के 15 प्रोफेसरों की नियुक्ति
सपा प्रवक्ता ने 69,000 शिक्षक भर्ती का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले में कोई सवाल नहीं उठाया गया, उन्होंने एक ही जाति के 15 प्रोफेसरों की नियुक्ति का भी मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि अगड़ों के आरक्षण या NFS (नॉट फाउंड सुटेबल) पर कभी इसी तरह की बात नहीं की जाती.
फखरुल हसन चांद ने सवाल किया कि अगर संपन्न लोगों से आरक्षण छोड़ने की अपील की जा सकती है, तो EWS के तहत मिलने वाले आरक्षण को लेकर भी ऐसी सलाह क्यों नहीं दी जाती.
कांग्रेस सांसद ने बताया संवैधानिक अधिकार
भागवत के बयान पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद करमवीर सिंह बौध ने भी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं है, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है, उन्होंने सामाजिक न्याय की उस सोच का जिक्र किया, जिसके आधार पर संविधान निर्माताओं ने व्यवस्था तैयार की थी.
राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि आरक्षण को लेकर BJP और RSS की विचारधारा पहले से स्पष्ट है, उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नहीं चाहते कि आरक्षण की व्यवस्था जारी रहे. भागवत के बयान के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है.
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