PoK Violence : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच कई मतदान केंद्रों पर झड़पें हुईं।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों ने आरोप लगाया कि रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मृतकों के नाम भी साझा किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने की कोशिश
भारत ने PoK में हो रहे विधानसभा चुनावों को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए PoK पर अपने कथित अवैध कब्जे को छिपाने और वहां मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।
प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग
JAAC ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी थीं। संगठन ने गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग की थी। मांगें पूरी नहीं होने के बाद बड़ी संख्या में लोग रावलाकोट में एकत्र हुए और मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू किया।
कई नेताओं को किया गया गिरफ्तार
विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने सुधनोती और रावलाकोट जिलों में चुनाव प्रक्रिया को 10 अगस्त तक स्थगित कर दिया है। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। सरकार ने प्रस्तावित आंदोलन से पहले संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
कई हफ्तों तक तनावपूर्ण रहे हालात
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के कारण कई इलाकों में लंबे समय तक धरने और सड़क जाम की स्थिति बनी रही। पुंछ डिवीजन, जहां विरोध सबसे ज्यादा देखने को मिला, वहां कई हफ्तों तक हालात तनावपूर्ण रहे। कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहे और मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुईं। जरूरी सामान की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ा।
PoK विधानसभा के लिए 45 सीटों पर चुनाव
PoK विधानसभा के लिए 45 सीटों पर चुनाव होना है। लगातार तनाव के चलते मतदान को तीन चरणों में कराने का फैसला लिया गया। विधानसभा की 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान आए कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
स्थानीय मतदाताओं की भूमिका कमजोर
इन्हीं 12 सीटों को लेकर सबसे बड़ा विवाद है। सरकार का कहना है कि ये सीटें पुरानी संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जबकि JAAC का आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं की भूमिका कमजोर होती है। संगठन का दावा है कि इन आरक्षित सीटों से पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को फायदा मिलता है। JAAC की मांग है कि पाकिस्तान के अन्य शहरों में रहने वाले लोगों को PoK की सरकार चुनने की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। संगठन इसे स्थानीय राजनीतिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
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