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इलेक्ट्रिक कारों में कम हो रही लोगों की दिलचस्पी, BMI की रिपोर्ट में खुलासा

Electric Cars : दुनियाभर में लोग इलेक्ट्रिक कारों से दूरी बना रहे हैं। बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस (BMI) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी माह में इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन में लगभग 11% की गिरावट देखी गई है। लगातार दूसरे महीने आई गिरावट के बाद ईवी की बिक्री करीब 10 लाख रह गई है जो कि फरवरी 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। इसके पीछे चीन में सब्सिडी का खत्म होना और ट्रंप प्रशासन की नई नीति को माना जा रहा है।

चीन के बाजार में बिक्री कम होने का प्रमुख कारण

चीन दुनिया का सबसे बड़ा ईवी बाजार है। यहां सरकार टैक्स छूट, ऑटो ट्रेड इन जैसी सुविधाओं के जरिए लोगों को ईवी के लिए प्रोत्साह्त करती रही है। हाल ही में चीन सरकार की ये सुविधाएं बंद हो गई हैं। इसका सीधा प्रभाव चीन के ईवी सेक्टर पर पड़ा और एक साल में बैट्री-इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड कारों के रजिस्ट्रेशन में 32% की गिरावट देखी गई। कड़ी प्रतिस्पर्धा और कीमतों की लड़ाई भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

BMI के डेटा मैनेजर चार्ल्स लेस्टर ने बताया कि उपभोक्ता कीमत को लेकर संवेदनशील रहते हैं। इसलिए सरकार द्वारा सब्सिडी प्रोत्साहन कम करने का असर पूरे ईवी सेक्टर पर दिखाई दिया।

नियमों में बदलाव का बाजार में असर

अमेरिका में ईवी टैक्स क्रेडिट योजना का चलन है। हाल ही में यह योजना बंद हो गई है। और ट्रंप प्रशासन ने CO2 उत्सर्जन मानकों में ढील देने का भी प्रस्ताव दिया है। इससे अमेरिकी महाद्वीप में ईवी सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फरवरी माह में उत्तरी अमेरिका में ईवी में 35% की गिरावट दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार नीतिगत हुए बदलाव और ईवी मांग में गिरावट से अमेरिकी बाजार में निवेश करने वाली कंपनियों को करीब 70 अरब डॉलर से ज्यादा का अवमूल्यन देखा गया है।

क्या है यूरोपीय ईवी सेक्टर की स्थिति?

यूरोपीय देशों में ईवी कारों की बिक्री में बढ़ोत्तरी तो देखी गई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में कम है। यूरोपीय देशों में भी हाल ही में ईवी खरीद में प्रोत्साहन योजनाओं में नरमी देखी गई है। जिसका प्रभाव बाजार पर देखा गया है।

जहां अमेरिका, चीन जैसे देशों में ईवी कारों की बिक्री में मंदी देखी गई, वहीं एशिया के उभरते बाजारों, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ईवी मांग में जबरदस्त बढोत्तरी देखी गई। इसके पीछे चीनी कंपनयों का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेजी से विस्तार करना माना जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो सरकारें यदि फिर से प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ावा देती हैं तो ईवी बाजार में बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है।

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