Fish Farming : ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में असम के मीडिया टूर पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने रविवार को गुवाहाटी के निकट सोनापुर स्थित देश के पहले एक्वा टेक पार्क का दौरा किया। इस दौरान पत्रकारों ने आधुनिक मत्स्य पालन, एक्वापोनिक्स, बायोफ्लॉक, सजावटी मछली पालन और अन्य नई तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की।
यह दौरा केवल असम की मत्स्य पालन व्यवस्था को समझने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पत्रकारों को यह देखने का अवसर भी मिला कि किस तरह तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए मछली पालन को किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए आय तथा स्वरोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है। देश के पहले एक्वा टेक पार्क का उद्घाटन जुलाई 2025 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोनापुर के बागीबारी में किया था।

नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया
यह एक्वा टेक पार्क कोलोंग-कोपिली की पहल है, जिसे NABARD, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर (CIFA), असम मत्स्य विभाग और सेल्को फाउंडेशन सहित सहयोगी संस्थाओं के साथ विकसित किया गया है। पार्क को आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों के प्रदर्शन, प्रशिक्षण और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां एक्वापोनिक्स, बायोफ्लॉक सिस्टम, आधुनिक मछली उत्पादन, सजावटी मछली पालन और अन्य नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है।
मछली पालन के साथ तकनीक और ऊर्जा का प्रयोग
मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पार्क की गतिविधियों और यहां इस्तेमाल की जा रही तकनीकों की जानकारी देते हुए कोलोंग-कोपिली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ज्योतिष तालुकदार ने आधुनिक मत्स्य पालन की संभावनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फिश फार्मिंग को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना जरूरी है, ताकि सीमित संसाधनों में भी उत्पादन और आय बढ़ाई जा सके। उनके मुताबिक किसानों को मत्स्य पालन के साथ नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे वे अपने स्तर पर इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता बढ़ा सकें।

दौरे के दौरान पत्रकारों को तालाब आधारित मत्स्य पालन के साथ फ्लोटिंग सोलर जैसी अवधारणाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। इस मॉडल में जल संसाधन का उपयोग मछली पालन के लिए करते हुए पानी की सतह पर सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावना को जोड़ा जाता है। ऐसे मॉडल का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना है, ताकि एक ही क्षेत्र से कृषि/मत्स्य उत्पादन के साथ ऊर्जा उत्पादन जैसी अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियां भी विकसित की जा सकें।
देशभर के किसानों को दी जाती है आधुनिक मत्स्य पालन की ट्रेनिंग
एक्वा टेक पार्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले किसानों और मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। उत्तर-पूर्व के विभिन्न राज्यों के किसानों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के लोगों के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था किए जाने की जानकारी प्रतिनिधिमंडल को दी गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मछली पालन, उत्पादन तकनीक, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और बाजार से जुड़ाव के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाता है।

फिशरी टेक्निकल एक्सपर्ट अश्लेषा श्रबोर्नि ने प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों को अलग-अलग समूहों में प्रशिक्षण देकर उन्हें व्यावहारिक रूप से आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल मछली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को ऐसी तकनीकों के बारे में जानकारी देना है जिन्हें वे अपने क्षेत्र और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अपनाकर आय बढ़ाने की दिशा में इस्तेमाल कर सकें।
बायोफ्लॉक और एक्वापोनिक्स से बदल रही मत्स्य पालन की तस्वीर
एक्वा टेक पार्क में बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए कम पानी में अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में मछली पालन की संभावनाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं एक्वापोनिक्स में मछली पालन और पौधों की खेती को एकीकृत किया जाता है। इस तरह के मॉडल जल और अन्य संसाधनों के अधिक कुशल इस्तेमाल की संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। पार्क में सजावटी मछली पालन और आधुनिक मत्स्य उत्पादन से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया गया है।

देश के पहले एक्वा टेक पार्क की स्थापना का मूल उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों से परिचित कराना है, जिनसे मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो सके। उद्घाटन के समय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी पार्क को किसानों को आधुनिक तकनीक का ज्ञान देने और मत्स्य उत्पादन तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया था।
असम में मत्स्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
असम जल संसाधनों से समृद्ध राज्य है और यहां बड़ी संख्या में नदियां तथा जलाशय मौजूद हैं। इसके बावजूद राज्य को लंबे समय तक अपनी मछली की मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ा। एक्वा टेक पार्क जैसी पहल का उद्देश्य इसी निर्भरता को कम करते हुए राज्य में स्थानीय मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना है। 2025 में पार्क के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी असम की मछली की मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, पर निर्भरता का उल्लेख किया था।
असम सरकार ने मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं और क्लस्टर आधारित पहलों पर भी जोर दिया है। एक्वा टेक पार्क को इसी व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, जहां नई तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव को एक साथ लाने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य मछली पालन को पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर एक संगठित और तकनीक आधारित आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर
एक्वा टेक पार्क का एक महत्वपूर्ण पहलू मत्स्य क्षेत्र में युवाओं को उद्यमिता के लिए तैयार करना भी है। आधुनिक तकनीकों की जानकारी, प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार से जुड़ाव के जरिए युवाओं के लिए मछली पालन को स्वरोजगार के विकल्प के रूप में विकसित किया जा सकता है। बायोफ्लॉक, एक्वापोनिक्स, सजावटी मछली पालन और आधुनिक उत्पादन तकनीकों में प्रशिक्षण लेकर युवा अपने स्तर पर छोटे या बड़े मत्स्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन को जोड़ते हैं और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हैं, तो उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकते हैं। वहीं प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव मजबूत होने पर स्थानीय स्तर पर फीड, उपकरण, परिवहन, प्रसंस्करण, बिक्री और अन्य सहायक सेवाओं में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत यूपी के पत्रकारों का अहम अनुभव
उत्तर प्रदेश के पत्रकारों का एक्वा टेक पार्क का यह दौरा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ मीडिया टूर के उद्देश्य से भी जुड़ा हुआ है। PIB लखनऊ के नेतृत्व में आयोजित इस दौरे के दौरान पत्रकार असम की संस्कृति, विरासत, पर्यटन, तकनीक, व्यापार और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से देख रहे हैं। एक्वा टेक पार्क में उन्हें असम के ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े एक ऐसे क्षेत्र को समझने का अवसर मिला, जिसमें आधुनिक तकनीक के जरिए बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।

मीडिया प्रतिनिधियों ने पार्क में मौजूद विभिन्न तकनीकों, किसानों के प्रशिक्षण और मत्स्य आधारित आजीविका की संभावनाओं को समझा। इस अनुभव के जरिए असम में हो रहे तकनीकी प्रयोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी कहानियों को उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
ग्रामीण आय और रोजगार का मजबूत आधार
देश का पहला एक्वा टेक पार्क इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करता है कि यदि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और स्थानीय किसानों को एक साथ जोड़ा जाए तो मत्स्य पालन को ग्रामीण आय और रोजगार का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। सोनापुर का यह केंद्र इसी सोच के साथ आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों को किसानों और युवाओं तक पहुंचाने का काम कर रहा है।
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