US Iran Tension : जर्मनी ने होर्मुज स्ट्रेट में संभावित सैन्य मिशन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. जर्मन के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने एआरडी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट संकेत दिया कि बर्लिन फिलहाल इस क्षेत्र में कोई सक्रिय सैन्य भूमिका नहीं निभाएगा.
वेडफुल ने कहा, “क्या हम जल्द ही इस संघर्ष का सक्रिय हिस्सा बनने जा रहै हैं? नहीं,” उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा केवल बातचीत और कूटनीतिक समाधान से ही सुनिश्चित की जा सकती है, उन्होंने यूरोपीय संघ के मौजूदा नौसैनिक मिशन ‘ऑपरेशन एस्पाइड्स’ का जिक्र करते हुए इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए. साथ ही उन्होंने कहा कि इस मिशन का दायरा होर्मुज तक बढ़ाने को लेकर भी संदेह बना हुआ है.
फरवरी 2024 में शुरू किया गया था
बता दें कि ऑपरेशन एस्पाइड्स फरवरी 2024 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य लाल सागर में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा व्यावसायिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों से सुरक्षा प्रदान करना था. यह मिशन रक्षात्मक ढांचे के तहत काम करता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार संचालित होता है.
हालांकि, वेडफुल ने एआरडी को बताया कि यह मिशन अपने वर्तमान क्षेत्र में भी प्रभावी साबित नहीं हुआ है, उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि जब समुद्री रास्तों को सुरक्षा की बात आती है तो यूरोप हमेशा रचनात्मक सहयोग देता है, लेकिन मुझे अभी इसकी कोई जरूरत नही है और सबसे बढ़कर, जर्मनी के इसमें शामिल होने की भी कोई गुंजाइश नहीं दिखती.
मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर
जर्मनी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है. ईरान के साथ जारी टकराव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित हुई है, जहां से दुनिया की लगभग 20–30 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरता है. इस बीच अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य अभियान के तहत की सैन्य क्षमताओं, खासकर उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बनाया है, जबकि जर्मनी ने ऐसी किसी भी सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखने का रूख अपनाया है.
अमेरिका के पास अपने तेल स्रोत मौजूद
इन सब के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मध्य-पूर्व के तेल पर ज्यादा निर्भर करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी के लिए गठबंधन में शामिल होने की मांग की है. डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह क्षेत्र उन्हीं देशों के लिए ज्यादा अहम है, जबकि अमेरिका के पास अपने तेल स्रोत मौजूद हैं.
ये भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों में चुनावों का ऐलान, 4 मई को आएगा रिजल्ट
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप









