Israel Election 2026 : इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। चुनाव प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप और कथित फंडिंग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इजराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने मामले की जांच सुरक्षा एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) को सौंपी है। शुरुआती चुनावी आंकड़ों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट, दोनों के गठबंधन बहुमत से पीछे हैं।
कतर और तुर्किये से फंडिंग के आरोप
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आशंका जताई है कि कतर और तुर्किये से इजराइल तथा वेस्ट बैंक में धन भेजा गया, जिसका इस्तेमाल अरब नागरिकों से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इन आरोपों के आधार पर विदेशी फंडिंग और चुनाव को प्रभावित करने की संभावनाओं की जांच की जा रही है।
हालांकि, विदेशी धन से चुनाव प्रभावित किए जाने के आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। इन्हें साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी की भूमिका आरोपों और उनसे जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल करना है।
नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों बहुमत से दूर
मतगणना के शुरुआती नतीजों के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 सीटें जाती दिख रही हैं। अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने का अनुमान है।
इजराइल की संसद, नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, किसी भी प्रमुख गठबंधन के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार गठन के लिए दूसरे दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
स्मोट्रिच और बेन ग्विर ने की कार्रवाई की मांग
इजराइल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने आरोप लगाया है कि विदेशी इस्लामी संगठनों से मिले धन के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने अरब पार्टियों के नेताओं से पूछताछ किए जाने की मांग की है। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने भी कतर से कथित तौर पर आए धन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया है। उन्होंने अरब पार्टियों के प्रमुखों और मामले में संदिग्ध माने जा रहे अन्य लोगों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
इन नेताओं की मांगों के बीच जांच का दायरा और उसके निष्कर्ष राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बन गए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या दल की संलिप्तता जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
आइजनकोट ने शपथ ग्रहण में देरी को लेकर दी चेतावनी
विपक्षी याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने कहा है कि विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल नई संसद के शपथ ग्रहण में देरी करने के लिए नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रत्येक शिकायत की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। हालांकि, जांच के नाम पर संसदीय प्रक्रिया को प्रभावित करना उचित नहीं होगा। इस बयान के बाद चुनावी जांच और नई संसद के गठन की समय-सीमा को लेकर बहस तेज हो गई है।
सेना और जेलों में मतदान के आंकड़े
इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के अनुसार, इस चुनाव में सेना के जवानों के बीच मतदान 79.9 प्रतिशत रहा। यह 2022 के चुनाव की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
इजराइल की जेल सेवा में मतदान 88.7 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत था। विदेशों में राजनयिक मिशनों पर तैनात इजराइली नागरिकों के बीच मतदान 86.7 प्रतिशत रहा, जो पिछले चुनाव के 69.6 प्रतिशत से अधिक है।
डबल-एनवेलप बैलेट की गिनती पर नजर
सेना के जवानों, जेलों में बंद मतदाताओं और विदेशों में तैनात कुछ इजराइली नागरिकों के मतों को डबल-एनवेलप बैलेट व्यवस्था के तहत गिना जाता है। इन मतों की गिनती सामान्य मतदान केंद्रों के मतों से अलग प्रक्रिया में होती है।
इन मतों का अंतिम परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह गिनती पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। इजराइल के चुनावी इतिहास में सैन्य मतदाताओं के वोटों का झुकाव अक्सर जायोनी दलों की ओर अधिक रहा है, जबकि अरब और अति-रूढ़िवादी दलों का समर्थन अपेक्षाकृत कम रहा है।
अब जांच और अंतिम नतीजों पर टिकी नजर
इजराइल में फिलहाल दो अहम सवाल हैं- क्या विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों की जांच में कोई ठोस सबूत सामने आता है और क्या कोई राजनीतिक गठबंधन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का समर्थन जुटा पाएगा। अंतिम मतगणना और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही इन सवालों पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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