Hindi Diwas 2026 : भारत की आजादी के बाद देश के सामने नई शासन व्यवस्था तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी थी. संविधान निर्माण के साथ कई ऐसे फैसले लेने थे, जो आने वाले समय में देश की दिशा तय करते. इन्हीं अहम मुद्दों में से एक था केंद्र सरकार के आधिकारिक कामकाज के लिए भाषा का चयन.
भारत भाषाई विविधता वाला देश है. यहां अलग-अलग क्षेत्रों में कई भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं. ऐसे में सरकारी कामकाज के लिए किसी एक भाषा को चुनना आसान निर्णय नहीं था.
भाषाई विविधता और भावनाओं का सम्मान
संविधान सभा में राजभाषा के मुद्दे पर सदस्यों के बीच कई विचार सामने आए. बहस केवल हिन्दी को राजभाषा बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया गया कि देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों की भावनाओं और विविधता का सम्मान किया जाए.
राजभाषा से जुड़े प्रावधानों पर संविधान सभा में लंबे समय तक विचार-विमर्श चला. सितंबर 1949 में यह चर्चा अपने अंतिम चरण में पहुंची. 12 सितंबर से 14 सितंबर के बीच राजभाषा के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बहस हुई.
14 सितंबर 1949 को हिंदी को मिला राजभाषा का दर्जा
लंबी चर्चा के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिन्दी को देवनागरी लिपि के साथ संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया. इसी ऐतिहासिक फैसले की याद में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है.
हालांकि, हिन्दी को राजभाषा बनाए जाने का अर्थ यह नहीं था कि अंग्रेजी का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दिया गया. सरकारी कामकाज में बदलाव के लिए एक संक्रमणकाल रखा गया, जिसमें अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रखने की अनुमति दी गई. बाद में संसद ने कानून के माध्यम से अंग्रेजी के इस्तेमाल की व्यवस्था को आगे भी जारी रखा.
हिन्दी को राष्ट्रभाषा कहना क्यों है गलत?
हिन्दी दिवस के मौके पर अक्सर राजभाषा और राष्ट्रभाषा को लेकर भ्रम देखने को मिलता है. संवैधानिक रूप से हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है.
भारतीय संविधान के भाग-17 में संघ की राजभाषा से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं. संविधान के अनुच्छेद 343 में कहा गया है कि संघ की राजभाषा हिन्दी होगी और इसकी लिपि देवनागरी होगी.
इसलिए संवैधानिक संदर्भ में हिंदी के लिए “राजभाषा” शब्द का इस्तेमाल करना ही सही है. 14 सितंबर 1949 के ऐतिहासिक निर्णय की याद में हिन्दी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई, जिसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के महत्व और उसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है.
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