
BRICS Summit 2026 : ब्रिक्स समिट 2026 की शुरुआत शनिवार, 12 सितंबर से हो रही है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई अहम समझौतों पर सहमति बनने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स के चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता—पर 50 से अधिक ठोस और व्यावहारिक नतीजे सामने आए हैं। इनमें विभिन्न फ्रेमवर्क और एक्शन प्लान भी शामिल हैं।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर
भारतीय अधिकारियों के हवाले से सामने आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए शिखर सम्मेलन के प्रमुख नतीजों में आतंकवाद की कड़ी निंदा और उसके सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में भारत की सदस्यता की दावेदारी के समर्थन को लेकर भी सहमति बनी है। भारत इस सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है।
पश्चिम एशिया के मुद्दे पर मतभेद के बावजूद सकारात्मक नतीजे की उम्मीद
पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर यूएई और ईरान के बीच मतभेदों के चलते साझा घोषणापत्र को लेकर पहले कुछ अनिश्चितता बनी हुई थी। इससे पहले पश्चिम एशिया के मुद्दे पर मतभेदों के कारण विदेश मंत्रियों की बैठक भी किसी साझा बयान के बिना समाप्त हुई थी।
हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत की अध्यक्षता को मिले व्यापक समर्थन के चलते शिखर सम्मेलन के सकारात्मक नतीजे के साथ समाप्त होने की उम्मीद है। भारत की ओर से पूरे साल विभिन्न स्तरों पर बातचीत और सहयोग के जरिए सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सालभर में 400 से ज्यादा बैठकों के जरिए आम सहमति बनाने की कोशिश
एक अधिकारी के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए भारत की अध्यक्षता के दौरान पूरे साल करीब 400 बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों के माध्यम से सदस्य देशों को एक मंच पर लाने और साझा सहमति तैयार करने की कोशिश की गई।
अधिकारी का कहना है कि इन प्रयासों के परिणामों से ब्रिक्स देशों के लोगों को लाभ मिला है। भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स को संवाद और रचनात्मक सहयोग के प्रभावी मंच के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया।
बहुपक्षवाद को मजबूत करने वाले सत्र से होगी शुरुआत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाले एक सत्र से होगी। यह सत्र बहुपक्षवाद को मजबूत करने के मुद्दे पर केंद्रित रहेगा।
सरकार का मानना है कि भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान बातचीत और रचनात्मक सहयोग के लिए एक पुल बनाने वाले देश की भूमिका निभाई है। मंत्रियों और विभिन्न एजेंसियों के प्रमुखों की बैठकों में तैयार किए गए आम सहमति वाले दस्तावेज भी भारत के इस प्रयास को दर्शाते हैं।
ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर भारत का जोर
भारत की अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं को वैश्विक व्यवस्था में अधिक प्रभावी तरीके से सामने रखने का प्रयास किया गया। सरकार के अनुसार, भारत उभरती वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में अपनी भूमिका को आगे बढ़ा रहा है।
इस दौरान भारत ने ब्रिक्स को केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग का मंच बनाए रखने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर संवाद और साझा समाधान तलाशने के लिए भी उपयोगी मंच के रूप में विकसित करने की कोशिश की है।
30 से अधिक शहरों में हुए कार्यक्रम
सरकार के अनुसार, ब्रिक्स की अध्यक्षता को पूरे देश का सामूहिक प्रयास बनाया गया। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ संस्थानों, उद्योग जगत, शिक्षा क्षेत्र, युवाओं, नागरिक समाज और विभिन्न समुदायों की भागीदारी रही।
भारत की अध्यक्षता के दौरान 30 से अधिक शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए ब्रिक्स से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक स्तर पर चर्चा और सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
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