Mukhmantri Sehat Yojana : मधुमेह कभी किसी चिकित्सकीय आपातकाल के रूप में सामने नहीं आती। आम तौर पर इसकी शुरुआत बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—जैसे बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना, बिना किसी कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। इन शुरुआती लक्षणों को अक्सर तब तक नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जब तक कि हालत इतनी गंभीर न हो जाए कि अस्पताल में भर्ती होने, आईसीयू में इलाज, सर्जरी या डायलिसिस की आवश्यकता पड़ जाए।
समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और उचित प्रबंधन ही मधुमेह की गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के ताज़ा स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि मधुमेह अब सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। यह तेज़ी से कामकाजी वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे परिवारों, नियोक्ताओं और स्वास्थ्य प्रणाली पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।
दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे मधुमेह के मामले
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के अनुसार असंतुलित आहार, जंक और प्रोसेस्ड भोजन, मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, मोटापा, तम्बाकू और शराब के सेवन के कारण दुनिया भर में मधुमेह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक काम करना, नींद पूरी न होना और लगातार तनाव ने भी इस बीमारी के खतरे को और बढ़ा दिया है।
स्वास्थ्य योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी…
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही स्वास्थ्य योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी (एस.एच.ए.), पंजाब द्वारा 21 जुलाई 2026 तक साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मधुमेह से संबंधित 2300 उपचार मामलों पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये (6,49,99,151.6 रुपये) खर्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों के सबसे अधिक 1123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 और 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मधुमेह तेज़ी से पंजाब की आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि इसका प्रभाव कम आयु वर्ग के लोगों पर भी नज़र आ रहा है।
इलाज के लिए सबसे अधिक दावे दर्ज
उपचार संबंधी आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अधिकांश मरीज़ गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। रक्त में शर्करा का स्तर बहुत अधिक होने के कारण उत्पन्न होने वाली जानलेवा स्थिति डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के इलाज के लिए सबसे अधिक दावे दर्ज किए गए।
भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर स्थिति
लंबे समय तक मधुमेह के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं को होने वाली क्षति से उत्पन्न डायबिटिक फुट उपचार की दूसरी सबसे प्रमुख स्थिति के रूप में सामने आया। कई मरीजों को डायलिसिस, रक्त चढ़ाव, सीटी और एमआरआई जांच, आईसीयू और डायबिटिक फुट सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जो अस्पताल में भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
ऐसे लोग जो जीवन के अंतिम पड़ाव…
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आंकड़े हर परिवार के लिए एक चेतावनी हैं। उन्होंने कहा, “ये ऐसे लोग नहीं हैं जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। ये प्रदेश की कामकाजी आबादी है—ऐसे लोग जो अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, व्यवसाय चला रहे हैं, कर्ज (लोन) चुका रहे हैं और अपने वृद्ध माता-पिता का सहारा बने हुए हैं।” उन्होंने कहा कि जब मधुमेह इस आयु वर्ग के लोगों को अस्पताल तक पहुंचा देती है, तो इसका प्रभाव सिर्फ मरीज़ तक सीमित नहीं रहता।
लोगों की जान तो बचा सकते हैं अस्पताल
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मधुमेह के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और नियमित रूप से रक्त शर्करा की जांच करवाएं। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मधुमेह की जटिलताओं का इलाज करवाने की तुलना में इसकी रोकथाम कहीं अधिक आसान है। बीमारी के गंभीर होने का इंतज़ार न करें। अस्पताल लोगों की जान तो बचा सकते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण खोए हुए साल वापस नहीं ला सकते।
तम्बाकू और शराब का अत्यधिक सेवन
जहां एक ओर पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार का खर्च उठाकर मरीजों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तम्बाकू और शराब के अत्यधिक सेवन से बचना मधुमेह और इससे होने वाली गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
मधुमेह संबंधी आंकड़े क्या बताते हैं-
36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में मधुमेह से संबंधित सबसे अधिक 1123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 और 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए।
21 जुलाई 2026 तक पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मधुमेह से संबंधित 2300 उपचार मामलों पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये (6,49,99,151.6) खर्च किए गए।
मधुमेह की गंभीर स्थिति को दर्शाने वाला डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक प्राप्त किया जाने वाला उपचार पैकेज रहा।
लंबे समय से नसों और रक्त वाहिकाओं को हुई क्षति का संकेत देने वाला डायबिटिक फुट दूसरी सबसे बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया है।
अनेक मरीजों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, रक्त चढ़ाव, सीटी/एमआरआई जाँच और डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हुईं।
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