Uttar Pradesh

UP सरकार ने रोकी 68 हजार कर्मचारियों की सैलरी, बड़ी वजह आई सामने

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों से संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। कुछ कर्मचारियों ने ब्यौरा दे दिया, कुछ का रह गया, जिसमें 68 हजार कर्मचारियों शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में जुटी है।

अधिकांश कर्मचारियों ने नहीं दी जानकारी

योगी सरकार ने आदेश का पालन न करने वाले करीब 68,000 कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है। सरकार ने कहा है कि जो कर्मचारी अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं देंगे, उन्हें वेतन नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद शनिवार तक अधिकांश कर्मचारियों ने यह जानकारी नहीं दी थी। अब अनुमान है कि सरकार के इस कदम के बाद सभी कर्मचारी जल्द ही अपना संपत्ति ब्यौरा जमा करेंगे।

संपत्ति का ब्योरा नहीं किया अपलोड

सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के 8,66,261 कर्मचारियों को 31 जनवरी तक अपने चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर देना था। सभी विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ब्योरा न देने वालों की सैलरी रोक दी जाएगी। हालांकि, आदेश के बावजूद 68,236 कर्मचारियों ने शनिवार रात तक संपत्ति का ब्योरा अपलोड नहीं किया, जिनमें से 34,926 कर्मचारी तृतीय श्रेणी के हैं।

इस विभाग के कर्मचारी शामिल

आदेश के बावजूद 68,236 कर्मचारियों ने शनिवार तक ब्योरा नहीं दिया, जिनमें तृतीय श्रेणी के 34,926, चतुर्थ श्रेणी के 22,624, द्वितीय श्रेणी के 7,204, प्रथम श्रेणी के 2,628 और अन्य 854 कर्मचारी शामिल हैं।

ये कर्मचारी लोक निर्माण, राजस्व, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता, आबकारी, खाद्य रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन और परिवहन विभाग के हैं। इन कर्मचारियों की सैलरी रोक दी गई है।

चल-अचल संपत्ति का ब्योरा

योगी सरकार ने बताया है कि जिन कर्मचारियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया, उन्हें जनवरी माह की सैलरी फरवरी में भी नहीं मिलेगी। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने विभागाध्यक्षों और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सभी कर्मचारियों का ब्योरा 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड हो।

सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कदम उठाया गया है और सरकारी संपत्ति विवरण जुटाने को लेकर योगी सरकार काफी गंभीर है।

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